ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” कहा जाता है।
हाई BP के 9 संकेत: शरीर में दिख सकते हैं ये लक्षण, जानें कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं
हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को प्रभावित करता रहता है। इसलिए नियमित BP जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कुछ लोगों में BP काफी बढ़ने पर सिरदर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या नजर में बदलाव जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। लेकिन इन लक्षणों को केवल हाई BP का संकेत मान लेना सही नहीं है, क्योंकि इनके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए केवल शरीर के संकेतों पर निर्भर रहने के बजाय समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना अधिक महत्वपूर्ण है।
हाई BP के ये 9 संकेत दिख सकते हैं
बहुत अधिक बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के दौरान कुछ लोगों को सिरदर्द हो सकता है। अगर सिरदर्द असामान्य हो, लगातार बना रहे या अचानक बहुत तेज हो जाए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि हर सिरदर्द हाई BP की वजह से नहीं होता।
कुछ लोगों को BP बढ़ने के दौरान चक्कर, कमजोरी या अस्थिरता महसूस हो सकती है। लेकिन चक्कर आने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जैसे शरीर में पानी की कमी, लो ब्लड शुगर या कान से जुड़ी समस्या। बार-बार चक्कर आने पर BP जांच के साथ डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP आंखों की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण कुछ लोगों को धुंधला दिखाई देने या नजर में बदलाव की शिकायत हो सकती है। अचानक नजर कमजोर होना या दिखाई देने में गंभीर बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए।
बहुत अधिक BP हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। कुछ गंभीर परिस्थितियों में सांस लेने में परेशानी, असामान्य थकान या सीने में दबाव महसूस हो सकता है। सांस फूलने के साथ सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण हों तो तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी हो सकती है।
कभी-कभी व्यक्ति को दिल की धड़कन तेज, जोर से या अनियमित महसूस हो सकती है। हालांकि इसका कारण सिर्फ हाई BP नहीं होता। तनाव, कैफीन, कुछ दवाएं और हृदय से जुड़ी अन्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
नाक से खून आना आमतौर पर हाई BP का सामान्य लक्षण नहीं माना जाता। हालांकि बहुत अधिक बढ़े हुए BP की गंभीर स्थिति में ऐसा हो सकता है। बार-बार नाक से खून आने पर BP की जांच के साथ इसके दूसरे संभावित कारणों की भी जांच करानी चाहिए।
लंबे समय तक अनियंत्रित BP शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डाल सकता है। कुछ लोगों को कमजोरी या असामान्य थकान महसूस हो सकती है। लेकिन थकान बहुत सामान्य शिकायत है और नींद की कमी, तनाव, एनीमिया या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं।
जब ब्लड प्रेशर बेहद ज्यादा बढ़ जाता है, तब बेचैनी, भ्रम, कमजोरी या व्यवहार में बदलाव जैसे गंभीर संकेत दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति को सामान्य थकान समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।
सीने में दर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर सीने में दर्द के साथ सांस फूलना, पसीना, कमजोरी या दर्द हाथ, कंधे, पीठ अथवा जबड़े तक फैल रहा हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है।
सिर्फ लक्षणों से नहीं पता चलता हाई BP
हाई BP की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अधिकांश लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसी कारण केवल सिरदर्द या चक्कर आने का इंतजार करके BP की पहचान करना सही तरीका नहीं है। ब्लड प्रेशर की सही स्थिति जानने का सबसे उपयोगी तरीका नियमित रूप से इसकी जांच करना है।
BP की रीडिंग को समझना भी जरूरी है
| श्रेणी | ऊपरी संख्या | निचली संख्या |
|---|---|---|
| सामान्य | 120 से कम | 80 से कम |
| Elevated | 120–129 | 80 से कम |
| Stage 1 | 130–139 | 80–89 |
| Stage 2 | 140 या अधिक | 90 या अधिक |
अलग-अलग दिशानिर्देशों और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार BP का आकलन अलग तरीके से किया जा सकता है। इसलिए लगातार अधिक रीडिंग आने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
घर पर BP नापते समय इन बातों का रखें ध्यान
सही BP रीडिंग के लिए मशीन के साथ-साथ सही तरीका भी जरूरी है। गलत तरीके से मापने पर रीडिंग वास्तविक स्थिति से अलग आ सकती है।
- BP नापने से पहले कम से कम 5 मिनट आराम करें।
- पीठ को सहारा देकर आराम से बैठें।
- दोनों पैर जमीन पर रखें और पैरों को क्रॉस न करें।
- जिस हाथ पर BP नाप रहे हैं, उसे आराम से सहारा दें।
- कफ सही आकार का हो और बांह पर उचित तरीके से लगाया गया हो।
- BP मापते समय बात करने या हिलने-डुलने से बचें।
- मापने से पहले कैफीन, धूम्रपान या व्यायाम जैसी गतिविधियों से पर्याप्त अंतर रखें।
- पहली रीडिंग ज्यादा आए तो कुछ मिनट आराम करके दोबारा जांच की जा सकती है।
एक रीडिंग देखकर घबराने की जरूरत नहीं
ब्लड प्रेशर दिनभर बदल सकता है। तनाव, शारीरिक गतिविधि, नींद, कैफीन और दूसरी परिस्थितियां इसकी रीडिंग को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए एक बार BP ज्यादा आने का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हाइपरटेंशन है।
अगर कई अलग-अलग मौकों पर BP सामान्य से अधिक आता है तो डॉक्टर से परामर्श करें। घर की BP रीडिंग को लिखकर रखना भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि समय के साथ रीडिंग का रिकॉर्ड डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद कर सकता है।
कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
⚠️ मेडिकल इमरजेंसी के संकेत
यदि BP की रीडिंग 180/120 mm Hg से ऊपर आती है, तो कम से कम एक मिनट बाद दोबारा BP जांचें। अगर रीडिंग फिर भी इतनी अधिक है और साथ में गंभीर लक्षण मौजूद हैं, तो तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लें।
- सीने में दर्द या दबाव
- सांस लेने में गंभीर परेशानी
- अचानक कमजोरी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन
- बोलने में परेशानी
- अचानक नजर में बदलाव
- भ्रम या बेहोशी
- अचानक बहुत तेज सिरदर्द
ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करके यह इंतजार नहीं करना चाहिए कि BP अपने आप नीचे आ जाएगा।
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है क्योंकि बहुत से लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखाई देना, सांस फूलना या थकान जैसे लक्षण कई दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं।
इसलिए हाई BP पहचानने का सबसे भरोसेमंद तरीका केवल शरीर के संकेतों का इंतजार करना नहीं, बल्कि समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना है। अगर आपकी BP रीडिंग बार-बार सामान्य से अधिक आती है तो डॉक्टर से सलाह लें।
संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश, नियमित BP मॉनिटरिंग और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार से BP को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
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