भाजपाई नारे के साथ बसपा | राजनीतिक विश्लेषण
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भाजपाई नारे के साथ बसपा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलते समीकरणों पर विशेष रिपोर्ट

बसपा की राजनीति में बदलाव के संकेत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय नारे "सबका साथ, सबका विकास" और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राजनीति में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी अब केवल पारंपरिक सामाजिक समीकरणों तक सीमित न रहकर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कर रही है। सोशल इंजीनियरिंग की अपनी पुरानी रणनीति को नया रूप देते हुए बसपा अब व्यापक सामाजिक समर्थन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

"बसपा अब सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति का संदेश देती हुई नजर आ रही है।"

इसी क्रम में लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की ओर से एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। दावा किया गया कि यह उत्तर प्रदेश में बसपा द्वारा आयोजित अब तक की सबसे बड़ी रैलियों में से एक रही। इस रैली में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों की भागीदारी देखने को मिली।

रैली के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने कई राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला और भारतीय जनता पार्टी की कुछ नीतियों की सराहना भी की। साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे ग्रामीण समाज को भ्रमित कर रहे हैं तथा लोगों को आपसी विवादों में उलझाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

"गांव वालों को आपस में लड़ने के बजाय मिल-जुलकर रहना चाहिए। राजनीतिक दल आते-जाते रहेंगे, लेकिन समाज को साथ रहना होगा।"

अपने संबोधन में मायावती ने कहा कि किसी भी मुद्दे या विचारधारा को लेकर समाज में वैमनस्य नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि जनता को ऐसे नेताओं से सावधान रहना चाहिए जो सामाजिक विभाजन के माध्यम से अपना राजनीतिक हित साधना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने "सबका साथ, सबका विकास" के सिद्धांत पर काम करते हुए ऐसी राजनीति की शुरुआत की, जिसमें सभी वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार भाजपा चाहती तो केवल जातीय राजनीति पर भी आगे बढ़ सकती थी, लेकिन उसने व्यापक जनसमर्थन की रणनीति अपनाई और लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने में सफल रही।

रैली की प्रमुख बातें

  • लखनऊ में बसपा की बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित हुई।
  • मायावती ने सपा पर तीखा हमला बोला।
  • भाजपा की कुछ नीतियों और विकास मॉडल की सराहना की।
  • सामाजिक एकता और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की अपील की।
  • ग्रामीण समाज को आपसी विवादों से बचने की सलाह दी।

योगी आदित्यनाथ के चर्चित नारे "कटोगे तो बटोगे" का उल्लेख करते हुए मायावती ने कहा कि बसपा का संदेश है "मिलकर रहोगे तो सुखी रहोगे, नहीं तो मौकापरस्त नेता तुम्हें बांटकर अपना फायदा उठाएंगे।" इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मायावती के इस भाषण के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है। खासकर समाजवादी पार्टी पर किए गए उनके हमलों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हुई हैं।

लेख में यह भी दावा किया गया है कि मायावती के बयानों के बाद सपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और पार्टी नेतृत्व की ओर से सफाई देने का प्रयास किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में बसपा और सपा के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।

                                                                                                                                                                                                  साभारः संजय विनायक जोशी डाट काम