खान सर और रोशन आनंद का मामला,मुख्यमंत्री भी मैदान में कूदे
प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत से गरमाई बिहार की कोचिंग राजनीति, जांच रिपोर्ट का इंतजार
पटना। बिहार की राजधानी पटना में खान ग्लोबल स्टडीज (केजीएस) और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच चल रहे विवाद के बीच प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में हुई मौत अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गई है, बल्कि यह बिहार की कोचिंग राजनीति, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।प्रिंस यादव की मौत के बाद जहां उनका परिवार इसे साजिश और हत्या का मामला बता रहा है, वहीं उनके साथ नेपाल में मौजूद दोस्तों का दावा है कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। दूसरी ओर नेपाल पुलिस भी हर पहलू की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष के लिए पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई के डर से नेपाल पहुंचे थे प्रिंस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटना में खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच बढ़े विवाद के बाद प्रिंस यादव का नाम भी चर्चाओं में आने लगा था। खान सर की कोचिंग पर हुए कथित हमले के मामले में नाम सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तारी की आशंका सताने लगी थी।प्रिंस के दोस्तों ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि बढ़ते दबाव और कानूनी कार्रवाई के डर से वह 3 जून को कुछ करीबी मित्रों के साथ नेपाल के विराटनगर चले गए थे। शुरुआत में सभी लोग मेट्रो सिटी होटल में ठहरे थे, लेकिन बाद में उन्होंने होटल बदल दिया और बाईपास क्षेत्र स्थित शुभ होटल के कमरा नंबर 102 में रहने लगे।
दोस्तों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से प्रिंस काफी तनाव में थे और पटना की घटनाओं को लेकर लगातार चिंतित रहते थे। उनका मानसिक स्वास्थ्य भी पूरी तरह सामान्य नहीं था और वह डॉक्टरों द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन कर रहे थे।मौत से पहले सामान्य था व्यवहारप्रिंस के साथ मौजूद दोस्तों का कहना है कि 13 जून की शाम अन्य दिनों की तरह सामान्य थी। उन्होंने भोजन किया, नियमित दवाएं लीं और आराम करने के लिए बिस्तर पर चले गए। किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद ऐसी दुखद घटना घट जाएगी।दोस्तों के अनुसार, उस शाम प्रिंस शांत और सामान्य दिखाई दे रहे थे। उन्होंने किसी तरह की बेचैनी या परेशानी की शिकायत भी नहीं की थी।
यही कारण है कि उनकी अचानक हुई मौत ने सभी को हैरान कर दिया।दोस्तों के बाहर जाने के बाद बिगड़ी हालत बताया जा रहा है कि जब प्रिंस होटल के कमरे में आराम कर रहे थे, तब उनके कुछ साथी पास के इनरवा क्षेत्र में घूमने चले गए थे। हालांकि कमरे में दो साथी—ललित और परजेस—उनके साथ मौजूद थे।इसी दौरान प्रिंस की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कमरे में मौजूद साथियों ने देखा कि वह असामान्य तरीके से लंबी-लंबी सांसें ले रहे हैं और उनकी स्थिति गंभीर होती जा रही है। घबराए साथियों ने तुरंत अन्य दोस्तों को फोन कर होटल वापस बुलाया।सूचना मिलते ही बाकी दोस्त भी जल्द होटल पहुंचे और बिना समय गंवाए एंबुलेंस की व्यवस्था कर उन्हें स्थानीय यूरो हॉस्पिटल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने कुछ समय बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हत्या की आशंका को दोस्तों ने किया खारिज
प्रिंस यादव की मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे हत्या बताया तो कुछ ने मारपीट की आशंका भी जताई।हालांकि उनके साथ मौजूद दोस्तों ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि प्रिंस उनके बेहद करीबी मित्र थे और उनके साथ किसी भी प्रकार की हिंसा या मारपीट नहीं हुई थी।दोस्तों के मुताबिक, शरीर पर चोट के निशान होने की बात भी सही नहीं है। उनका मानना है कि मौत के पीछे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, मानसिक तनाव या दवाओं का प्रभाव जैसी वजहें हो सकती हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
कमरे से मिलीं कई दवाएं
नेपाल पुलिस की प्रारंभिक जांच में होटल के कमरे से कई प्रकार की दवाएं बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मिर्गी और मानसिक तनाव से संबंधित दवाएं शामिल बताई जा रही हैं।जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं दवाओं का अत्यधिक सेवन, किसी स्वास्थ्य जटिलता या अन्य कारण ने इस घटना को जन्म तो नहीं दिया। पुलिस लगातार प्रिंस के दोस्तों से पूछताछ कर रही है और उनके अंतिम दिनों की गतिविधियों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है।नेपाल पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया गया है और जांच पूरी निष्पक्षता से आगे बढ़ रही है।
रौशन आनंद ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक और प्रिंस यादव के बड़े भाई रौशन आनंद जेल से बाहर आए। उन्होंने अपने भाई की मौत को सामान्य घटना मानने से इनकार कर दिया।रौशन आनंद ने दावा किया कि उनके भाई की हत्या कराई गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी खुद की जान को भी खतरा है और जेल के अंदर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी।रौशन ने सीधे तौर पर फैजल खान उर्फ खान सर का नाम लेते हुए कई सवाल उठाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर मामले को देख रही हैं।
बिहार की कोचिंग राजनीति पर उठे सवाल
प्रिंस यादव की मौत ऐसे समय हुई है जब बिहार में निजी कोचिंग संस्थानों की भूमिका, प्रतिस्पर्धा और विवाद पहले से चर्चा में हैं। खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच चल रहे विवाद ने पहले ही राज्य की शिक्षा व्यवस्था और कोचिंग संस्कृति को बहस का विषय बना दिया था।अब इस मौत के बाद राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं और मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कर रहा है।
सम्राट चौधरी का बड़ा बयान
इस बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कोचिंग संस्कृति पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिसमें छात्रों को निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।सम्राट चौधरी ने कहा, “आगे के दिनों में सारे कोचिंग सेंटर बंद हो जाएं और केवल बिहार सरकार का स्कूल चलता रहे, ऐसी व्यवस्था खड़ी करेंगे।”उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रही है। 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं और सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि उनका सपना तब पूरा होगा जब समाज के हर वर्ग के बच्चे, चाहे वे नेता के हों या डॉक्टर के, सरकारी मॉडल स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करें।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल प्रिंस यादव की मौत का रहस्य बरकरार है। एक ओर परिवार हत्या की आशंका जता रहा है तो दूसरी ओर दोस्तों और प्रारंभिक जांच में स्वास्थ्य संबंधी कारणों की संभावना सामने आ रही है।अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और नेपाल पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रिंस यादव की मौत के पीछे बीमारी, दवाओं का प्रभाव, मानसिक तनाव या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह मामला बिहार की राजनीति, शिक्षा जगत और आम जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना रहेगा।
