सरेआम अश्लील हरकतों से लेकर अंधेरी सड़क तक
सरेआम अश्लील हरकतों से लेकर अंधेरी सड़क तक: LSR की छात्राओं ने बताया डर, बोलीं—“सुरक्षित महसूस कब करेंगे?”
छात्राओं ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया है कि उन्हें लंबे समय से सड़क पर छेड़छाड़, पीछा किए जाने और अश्लील हरकतों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। कुछ छात्राओं ने यह भी बताया कि सुनसान रास्तों पर पुरुषों द्वारा सार्वजनिक रूप से अश्लील प्रदर्शन किए जाने जैसी घटनाएं देखी गई हैं।
इन शिकायतों ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—अगर राजधानी के एक प्रतिष्ठित महिला कॉलेज के बाहर छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, तो सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
शाम के समय सुनसान रास्ते, पर्याप्त रोशनी की कमी, संदिग्ध गतिविधियां और नियमित सुरक्षा व्यवस्था को लेकर छात्राओं ने चिंता जताई है।
शाम होते ही बदल जाता है माहौल
LSR के बैक गेट के आसपास का एक हिस्सा शाम के बाद काफी सुनसान हो जाता है। छात्राओं के मुताबिक, यहां पर्याप्त रोशनी और नियमित पुलिस पेट्रोलिंग की जरूरत है।
कुछ छात्राओं ने मीडिया को बताया कि वे शाम के समय अकेले निकलने से बचती हैं। कई छात्राएं समूह में घर या PG तक जाती हैं और परिवार के सदस्यों के साथ अपनी लाइव लोकेशन साझा करती हैं।
एक छात्रा ने बताया कि सुरक्षा की चिंता इतनी बढ़ गई है कि छात्राएं अपने साथ पेपर स्प्रे और भारी पानी की बोतल जैसी चीजें रखने लगी हैं।
“सुरक्षा का डर इतना बढ़ गया है कि छात्राएं अकेले निकलने के बजाय समूह में जाना और परिवार को लाइव लोकेशन भेजना जरूरी समझती हैं।”
अश्लील हरकतों की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
छात्राओं की सबसे बड़ी शिकायतों में से एक सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील व्यवहार है। उनके मुताबिक, कुछ पुरुष सुनसान हिस्सों में लड़कियों को देखकर अश्लील हरकतें करते हैं और कई बार जानबूझकर उन्हें असहज करने की कोशिश करते हैं।
ऐसी घटनाओं में हर बार पुलिस शिकायत दर्ज कराना आसान नहीं होता। कई बार घटना कुछ सेकंड की होती है, आरोपी मौके से निकल जाता है और पीड़िता या प्रत्यक्षदर्शी के पास कोई वीडियो या अन्य सबूत नहीं होता।
यही वजह है कि छात्राओं का सवाल है कि क्या किसी महिला को अपनी सुरक्षा की चिंता व्यक्त करने के लिए हर घटना का वीडियो या दूसरा प्रमाण उपलब्ध कराना जरूरी होना चाहिए?
आस्था कुंज पार्क की घटना ने डर और बढ़ा दिया
LSR के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई जब 21 सितंबर 2026 को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर लड़की और उसके दोस्त को रोका था। बाद में लड़की को पार्क के सुनसान हिस्से में ले जाकर कथित अपराध किया गया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक आरोपी को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें उसके पैर में गोली लगी।
कॉलेज की छात्राओं ने निकाला सॉलिडेरिटी मार्च
घटना के बाद LSR सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों की छात्राएं सड़क पर उतरीं। 23 सितंबर को आयोजित सॉलिडेरिटी मार्च में बड़ी संख्या में छात्राओं ने हिस्सा लिया और महिला सुरक्षा को लेकर बेहतर व्यवस्था की मांग की।
छात्रों की मांग केवल किसी एक घटना के आरोपियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं थी। वे चाहती हैं कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं को रोज कॉलेज से निकलते समय डर के माहौल से न गुजरना पड़े।
पिंक बूथ है, लेकिन पुलिस की मौजूदगी पर सवाल
छात्राओं ने कॉलेज के आसपास मौजूद पुलिस पिंक बूथ और पुलिस पेट्रोलिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कुछ छात्रों के मुताबिक, बूथ हमेशा सक्रिय नजर नहीं आता और पुलिस की नियमित मौजूदगी की कमी महसूस होती है।
दूसरी ओर, कॉलेज प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और निगरानी बढ़ाने की बात सामने आई है। ऐसे में छात्राओं की अपेक्षा है कि सुरक्षा इंतजाम केवल किसी बड़ी घटना के बाद सक्रिय न हों, बल्कि नियमित रूप से दिखाई दें।
पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, सक्रिय CCTV, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, सुरक्षित पैदल रास्ते, शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई और छात्राओं के लिए आसान शिकायत तंत्र—इन सभी व्यवस्थाओं को एक साथ मजबूत करना जरूरी है।
सवाल सिर्फ LSR का नहीं
LSR की छात्राओं की चिंता को केवल एक कॉलेज की समस्या मानकर खत्म नहीं किया जा सकता। दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों में बड़ी संख्या में छात्राएं और कामकाजी महिलाएं PG, हॉस्टल और किराये के कमरों में रहती हैं।
उन्हें रोज कॉलेज, मेट्रो स्टेशन, बाजार और घर के बीच ऐसे रास्तों से गुजरना पड़ता है जहां सुरक्षा व्यवस्था असमान हो सकती है।
महिला सुरक्षा का मतलब सिर्फ किसी घटना के बाद आरोपी को पकड़ना नहीं है। सुरक्षा का वास्तविक अर्थ यह है कि महिला बिना डर के सड़क पर चल सके, शाम को घर लौट सके और उसे हर कदम पर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत न पड़े।
LSR की छात्राओं की आवाज इसी बुनियादी सवाल को सामने ला रही है—क्या राजधानी की लड़कियों को सामान्य जिंदगी जीने के लिए अपने बैग में पेपर स्प्रे और अपने फोन में लाइव लोकेशन रखकर चलना पड़ेगा?
सुरक्षा सिर्फ घटना के बाद की कार्रवाई नहीं
किसी भी कॉलेज की सुरक्षा केवल उसके मुख्य गेट या परिसर के अंदर मौजूद सुरक्षा कर्मियों से तय नहीं होती। कॉलेज से बाहर निकलने के बाद छात्राओं को मिलने वाला सुरक्षित रास्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
लगातार पेट्रोलिंग, बेहतर रोशनी, सक्रिय CCTV, जवाबदेह सुरक्षा व्यवस्था और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई ऐसी व्यवस्थाएं हैं जिनसे सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के भरोसे को मजबूत किया जा सकता है।
LSR की छात्राओं की चिंताएं इसी व्यापक मुद्दे की ओर ध्यान दिलाती हैं। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि हर छात्रा ने अपने साथ क्या सुरक्षा सामान रखा है, बल्कि यह होना चाहिए कि सार्वजनिक स्थान इतने सुरक्षित कैसे बनाए जाएं कि किसी छात्रा को अपनी सुरक्षा के लिए हर समय अतिरिक्त तैयारी न करनी पड़े।
रिपोर्ट के स्रोत
इस लेख में उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में LSR छात्राओं की सुरक्षा संबंधी चिंताओं, आस्था कुंज पार्क की घटना, 23 सितंबर के सॉलिडेरिटी मार्च और कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित प्रकाशित जानकारी का उपयोग किया गया है।
