28 पत्नियों की चर्चा से आए सुर्खियों में
28 पत्नियों की चर्चा से आए सुर्खियों में, साइकिल बंधक रख जीता था पहला चुनाव, जानें पूर्व सांसद बागुन सुम्ब्रुई की कहानी
बागुन सुम्ब्रुई की जिंदगी का एक दूसरा पहलू भी लंबे समय तक चर्चा में रहा—उनकी कथित शादियां। अलग-अलग रिपोर्टों में उनकी पत्नियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। कहीं 23, कहीं 28 तो कहीं इससे भी ज्यादा संख्या का उल्लेख मिलता है।
हालांकि, इन संख्याओं को लेकर एकरूपता नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में खुद बागुन सुम्ब्रुई द्वारा अलग-अलग समय पर कुछ पत्नियों के नाम स्वीकार किए जाने और अन्य महिलाओं के दस्तावेजों में उनका नाम पति के तौर पर दर्ज होने जैसे दावे मिलते हैं। इसलिए उनकी पत्नियों की निश्चित संख्या को लेकर सावधानी जरूरी है।
चाईबासा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
बागुन सुम्ब्रुई का राजनीतिक सफर चाईबासा विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुआ। वर्ष 1967 में उन्होंने पहली बार चाईबासा विधानसभा सीट से चुनाव जीता। इसके बाद 1969 और 1972 में भी वे विधानसभा पहुंचे। लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2000 में उन्होंने फिर विधानसभा चुनाव जीता।
विधानसभा की राजनीति के साथ-साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र से वे कई बार सांसद चुने गए। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उन्होंने 1977, 1980, 1984, 1989 और 2004 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रतिनिधित्व किया।
सादगी थी उनकी पहचान
बागुन सुम्ब्रुई की राजनीतिक शैली दूसरे नेताओं से काफी अलग मानी जाती थी। उनका पहनावा बेहद साधारण रहता था। धोती पहनना और कई बार नंगे पैर रहना उनकी पहचान का हिस्सा था।
वे अपने क्षेत्र में लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाते थे। उनका राजनीतिक जीवन कई दशकों तक चला, लेकिन उनकी जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया।
28 शादियों का दावा आखिर आया कहां से?
बागुन सुम्ब्रुई की निजी जिंदगी में सबसे ज्यादा चर्चा उनकी कथित शादियों को लेकर हुई। विभिन्न रिपोर्टों में उनकी पत्नियों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
एक रिपोर्ट में 28 महिलाओं से जुड़े दस्तावेजों में बागुन सुम्ब्रुई का नाम पति के रूप में दर्ज होने का उल्लेख किया गया। इसी के बाद 28 शादियों का आंकड़ा व्यापक चर्चा में आया।
लेकिन दूसरी ओर कुछ रिपोर्टों में संख्या इससे काफी अधिक बताई गई है। कहीं 50 से ज्यादा और कहीं 58 तक के दावे भी सामने आए। इसलिए यह कहना कि उनकी निश्चित रूप से 28 पत्नियां थीं, उपलब्ध अलग-अलग दावों को देखते हुए पूरी तरह स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
बागुन सुम्ब्रुई की निजी जिंदगी से जुड़ी संख्याओं को अलग-अलग रिपोर्टों में किए गए दावों के रूप में देखना जरूरी है। उपलब्ध विवरणों में इस विषय पर एकरूपता नहीं मिलती।
खुद बागुन सुम्ब्रुई ने क्या कहा था?
अपनी निजी जिंदगी को लेकर सवाल पूछे जाने पर बागुन सुम्ब्रुई ने कथित तौर पर अलग तस्वीर पेश की थी। उनका कहना था कि कई महिलाएं अपनी परेशानियां लेकर उनके पास आती थीं।
उनके अनुसार इनमें विधवा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल थीं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कुछ महिलाएं सरकारी नौकरी या सरकारी सुविधाओं से जुड़े मामलों में अपना नाम उनके साथ जोड़ती थीं।
इसलिए उनके नाम से जुड़ी महिलाओं की संख्या और वास्तव में वैवाहिक संबंधों की संख्या को एक ही मानना उचित नहीं होगा। यह मामला मुख्यतः पुराने मीडिया विवरणों, राजनीतिक चर्चाओं और उनके अपने बयानों के आधार पर सामने आता है।
सिर्फ 910 रुपये और एक साइकिल से चुनाव!
बागुन सुम्ब्रुई की राजनीतिक यात्रा का सबसे दिलचस्प किस्सा उनके पहले चुनाव से जुड़ा है।
बताया जाता है कि 1967 का पहला विधानसभा चुनाव उन्होंने करीब 910 रुपये में लड़ा था। उस समय चुनाव प्रचार के लिए आज की तरह बड़े संसाधन, महंगे प्रचार अभियान और आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी।
बागुन खुद साइकिल से क्षेत्र में घूमकर लोगों तक पहुंचते थे। कहानी का सबसे चर्चित हिस्सा यह है कि प्रचार के दौरान पैसों की जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपनी साइकिल तक 125 रुपये में बंधक रख दी थी।
पांच बार सांसद और चार बार विधायक
बागुन सुम्ब्रुई का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। वे चाईबासा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे और सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद चुने गए।
उनकी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी बहुल कोल्हान क्षेत्र और झारखंड की राजनीतिक पहचान से जुड़ा रहा। झारखंड अलग राज्य की मांग और उसके आसपास की राजनीति में भी उनकी सक्रियता का उल्लेख मिलता है।
बागुन सुम्ब्रुई की राजनीतिक टाइमलाइन
चाईबासा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतने का उल्लेख।
विधानसभा की राजनीति में उनकी मौजूदगी बनी रही।
सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र से कई बार सांसद चुने गए।
लंबे अंतराल के बाद फिर चाईबासा विधानसभा पहुंचे।
सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र से एक बार फिर संसद पहुंचे।
बागुन सुम्ब्रुई का निधन हुआ।
22 जून 2018 को हुआ निधन
लंबी राजनीतिक पारी के बाद 22 जून 2018 को बागुन सुम्ब्रुई का निधन हो गया।
उनके निधन के बाद भी उनकी राजनीतिक यात्रा और निजी जीवन से जुड़े किस्से लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। एक तरफ उनके चुनावी संघर्ष, सादगी और लंबे राजनीतिक जीवन की कहानी है, तो दूसरी तरफ उनकी कथित शादियों को लेकर अलग-अलग दावे हैं।
बागुन सुम्ब्रुई की कहानी इस लिहाज से भी अलग है कि इसमें भारतीय राजनीति के उस दौर की झलक मिलती है, जब सीमित संसाधनों के साथ नेता सीधे जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ते थे।
साइकिल से प्रचार करने और जरूरत पड़ने पर उसी साइकिल को बंधक रखने का किस्सा उनकी शुरुआती राजनीतिक परिस्थितियों को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण है।
पत्नियों की संख्या पर क्या है सावधानी?
उनकी पत्नियों की संख्या से जुड़े दावों को देखते हुए यह जरूरी है कि 23, 28, 50 या 58 जैसी संख्याओं को अंतिम और निर्विवाद तथ्य के रूप में पेश करने के बजाय उन्हें अलग-अलग रिपोर्टों में किए गए दावे माना जाए।
यही विरोधाभास बागुन सुम्ब्रुई की कहानी को आज भी चर्चा में बनाए रखता है—एक ऐसा नेता जिसने बेहद साधारण तरीके से राजनीतिक सफर शुरू किया, कई बार विधानसभा और संसद पहुंचा और जिसकी निजी जिंदगी से जुड़े किस्से उसकी राजनीतिक पहचान के समानांतर लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बने रहे।
