SIR नोटिस के बाद पुराने दस्तावेज खोज रहे दिल्ली के मतदाता
एक-एक कागज का हिसाब! SIR नोटिस के बाद पुराने दस्तावेज खोज रहे दिल्ली के मतदाता
वर्षों पुराने बिजली-पानी के बिल और दूसरे दस्तावेज अब मतदाताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। सुनवाई केंद्रों पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है।
मतदाता अपने मतदान के अधिकार से जुड़े दावे को मजबूत करने के लिए ऐसे दस्तावेज तलाश रहे हैं, जो लंबे समय से घर के किसी कोने में रखे हुए थे। किसी ने पुरानी फाइलें निकालीं तो किसी ने बंद पड़े संदूक और अलमारियों की तलाशी शुरू कर दी।
खबर की प्रमुख बातें
- SIR नोटिस के बाद पुराने कागजात तलाश रहे मतदाता।
- मतदाता अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज पेश कर रहे हैं।
- सुनवाई केंद्रों पर दावों और आपत्तियों का निपटारा जारी है।
- कई परिवार वर्षों पुराने बिजली-पानी के बिल खोज रहे हैं।
SIR नोटिस के बाद बढ़ी पुराने कागजों की तलाश
SIR प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें सुनवाई केंद्र पर अपने दावे से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ रहे हैं। इसी वजह से दिल्ली के कई इलाकों में लोग अपने पुराने रिकॉर्ड खोजने में जुटे हैं।
कई परिवारों में बिजली-पानी के बिल या अन्य कागजात वर्षों तक इसलिए संभालकर रखे जाते हैं क्योंकि भविष्य में उनकी जरूरत पड़ सकती है। अब यही पुराने कागज मतदाता सूची से जुड़े सत्यापन में उपयोगी हो सकते हैं।
स्थिति यह है कि घरों में लंबे समय से बंद पड़े संदूकों तक को खोला जा रहा है। धूल से ढके पुराने कागजात की एक-एक फाइल देखी जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज सुनवाई केंद्र में जमा किए जा सकें।
सुनवाई केंद्रों पर पहुंच रहे मतदाता
नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में बनाए गए सुनवाई केंद्र पर मंगलवार को कई मतदाता पहुंचे। किसी को मैपिंग से संबंधित जवाब देना था तो कोई पुराने दस्तावेज लेकर अपने दावे को मजबूत करने आया था।
केंद्र पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई की गई। मतदाताओं के लिए यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और दावे आगे की मतदाता सूची प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
पुराने दस्तावेज अब कई परिवारों के लिए सिर्फ कागज नहीं, बल्कि उनके दावे से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बन गए हैं।
15 साल पुराना बिजली बिल बना सहारा
सोनू कोहली
मतदाता — SIR सुनवाई से जुड़ा मामला
मतदाता सोनू कोहली का मामला इस पूरी प्रक्रिया की कठिनाई को समझने का एक उदाहरण है। वह संयुक्त परिवार में रहते हैं और उनके तीन भाई भी साथ रहते हैं।
उनके अनुसार, परिवार के सदस्यों ने पिता के नाम के आधार पर वर्ष 2002 की मतदाता सूची से मैपिंग कराई थी। इसके बावजूद केवल उन्हें नोटिस मिला।
सुनवाई के दौरान उनसे वर्ष 2011 का बिजली बिल मांगा गया। सौभाग्य से उनके पिता पुराने कागजात संभालकर रखते थे। इसी वजह से परिवार के पास करीब 15 साल पुराना बिजली बिल मौजूद था।
सोनू ने यह दस्तावेज सुनवाई केंद्र पर जमा कर दिया। अब उन्हें उम्मीद है कि इससे उनका दावा आगे की प्रक्रिया में स्वीकार किया जाएगा।
मटिया महल के साजेब को भी मिला नोटिस
मटिया महल के साजेब भी SIR नोटिस लेकर सुनवाई केंद्र पहुंचे। उनके मुताबिक परिवार के किसी दूसरे सदस्य को नोटिस नहीं मिला, जबकि उन्हें पिता के साथ मैपिंग नहीं होने का हवाला देकर नोटिस दिया गया था।
साजेब का कहना था कि मैपिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद बीएलओ की ओर से मांगे गए दस्तावेज उन्हें जमा करने पड़े। उनके अनुसार, जरूरी कागजात जमा करने के बाद उनका नोटिस निस्तारित कर दिया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके जैसे कई अन्य लोगों को भी नोटिस मिला, जबकि वे पहले ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर चुके थे।
भीड़ नियंत्रित करने के लिए तीन समय-स्लाट
सुनवाई केंद्रों पर एक साथ बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ न हो, इसके लिए तीन समय-स्लाट बनाए गए हैं। लोगों को अलग-अलग समय पर बुलाया जा रहा है।
हालांकि कुछ केंद्रों पर भीड़ के कारण लोगों को परेशानी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में सुनवाई केंद्रों की व्यवस्था और समय-स्लाट लोगों की सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
लाखों मतदाताओं को भेजे गए नोटिस
📊 SIR प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख आंकड़े
दावे और आपत्तियों की समय सीमा
रिपोर्ट के अनुसार, ड्राफ्ट रोल में शामिल करीब 97 लाख लोगों में से लगभग 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। इसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
दावे और आपत्तियां 30 सितंबर तक लिए जाने हैं। इसके बाद 29 अक्टूबर तक उनका निपटारा किए जाने की जानकारी दी गई है। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है।
पुराने दस्तावेजों ने बढ़ाई चिंता और उम्मीद
SIR की प्रक्रिया ने दिल्ली के कई परिवारों को यह याद दिला दिया है कि पुराने दस्तावेजों को संभालकर रखना कितना उपयोगी हो सकता है। जिन कागजातों को कभी सामान्य रिकॉर्ड समझकर फाइलों में रख दिया गया था, आज वही किसी दावे के समर्थन में काम आ रहे हैं।
हालांकि, किसी भी दस्तावेज की स्वीकार्यता संबंधित प्रक्रिया और अधिकारियों के सत्यापन पर निर्भर करती है। इसलिए मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे नोटिस में दिए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित दस्तावेज और दावा प्रस्तुत करें।
SIR की प्रक्रिया के बीच दिल्ली में फिलहाल एक अलग तस्वीर देखने को मिल रही है—पुरानी अलमारियां खुल रही हैं, संदूक खंगाले जा रहे हैं और वर्षों पुराने कागजों की तलाश हो रही है। लोगों के लिए ये कागज सिर्फ पुराने रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मतदाता सूची में अपने नाम से जुड़े दावे का महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं।
