चार पीढ़ियों के 90 सदस्य, एक ही छत के नीचे
चार पीढ़ियों के 90 सदस्य एक ही छत के नीचे, फरीदाबाद का भारद्वाज परिवार बना संयुक्त परिवार की मिसाल
10 चूल्हों पर बनता है खाना और मतभेद होने पर वोटिंग से लिया जाता है फैसला। जानिए 90 सदस्यों वाले इस अनोखे परिवार की कहानी।
आज के दौर में जहां छोटे-छोटे परिवारों में भी संपत्ति, जिम्मेदारियों और आपसी मतभेदों को लेकर विवाद देखने को मिलते हैं, वहीं हरियाणा के फरीदाबाद क्षेत्र का एक परिवार संयुक्त परिवार की ऐसी तस्वीर पेश करता है, जो लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है। इस परिवार में चार पीढ़ियों के कुल 90 सदस्य एक ही घर में रहते हैं और मिल-जुलकर अपनी जिंदगी आगे बढ़ा रहे हैं।
यह है भारद्वाज परिवार, जिसके मुखिया 93 वर्षीय छज्जूराम हैं। परिवार के सभी सदस्य एक बड़े घर में रहते हैं और वर्षों से एक-दूसरे के साथ सुख-दुख बांटते आए हैं। ऐसे समय में जब एक ही पीढ़ी के भाई भी अलग-अलग घर बसाने की इच्छा रखते हैं, तब चार पीढ़ियों का एक साथ रहना अपने आप में किसी मिसाल से कम नहीं है।
करीब एक एकड़ में बना है परिवार का विशाल घर
भारद्वाज परिवार फरीदाबाद के पलवली गांव में रहता है। परिवार का घर करीब एक एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ बताया जाता है। इतने बड़े परिवार के लिए स्वाभाविक रूप से व्यवस्थाएं भी बड़ी हैं। घर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी की अपनी जिम्मेदारियां और भूमिकाएं हैं।
90 सदस्यों वाले परिवार में सबसे बड़ी चुनौती रोजमर्रा की व्यवस्था को संभालना होती है। भोजन, बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की देखभाल, आर्थिक जिम्मेदारियां और पारिवारिक फैसले—इन सभी कामों को एक साथ संभालना आसान नहीं है। यही कारण है कि परिवार ने अपनी व्यवस्था को आपसी सहयोग और जिम्मेदारी के आधार पर विकसित किया है।
बताया जाता है कि परिवार के सभी सदस्यों के लिए भोजन तैयार करने हेतु 10 चूल्हों पर खाना बनाया जाता है। सुबह से शुरू होने वाली रसोई की गतिविधियां पूरे दिन परिवार की जरूरतों के अनुसार चलती रहती हैं। इतने लोगों के भोजन की व्यवस्था किसी छोटे सामुदायिक कार्यक्रम से कम नहीं होती।
मतभेद होने पर होती है वोटिंग
इतने बड़े परिवार में हर व्यक्ति की सोच एक जैसी हो, यह संभव नहीं है। अलग-अलग उम्र, अलग-अलग अनुभव और अलग-अलग विचारों के कारण कई बार मतभेद होना स्वाभाविक है। हालांकि भारद्वाज परिवार ने इन मतभेदों को सुलझाने का एक बेहद दिलचस्प तरीका अपनाया है।
परिवार में यदि किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदस्यों के बीच सहमति नहीं बनती, तो वोटिंग के जरिए फैसला किया जाता है। यानी परिवार के सदस्य अपनी राय रखते हैं और बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
यह व्यवस्था परिवार के लोकतांत्रिक माहौल को भी दर्शाती है। किसी एक व्यक्ति की राय को सभी पर थोपने के बजाय सदस्यों की भागीदारी से फैसला करने की कोशिश की जाती है। इससे परिवार के लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
भारद्वाज परिवार की खास बातें
👨👩👧👦 कुल सदस्य: 90
🏠 पीढ़ियां: 4
👴 परिवार मुखिया: 93 वर्षीय छज्जूराम
🔥 भोजन व्यवस्था: 10 चूल्हों पर खाना
🗳️ निर्णय प्रक्रिया: मतभेद होने पर वोटिंग
📍 स्थान: पलवली गांव, फरीदाबाद
परिवार का खर्च कैसे चलता है?
90 सदस्यों वाले परिवार का नाम सुनते ही सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर इतने बड़े परिवार का खर्च कैसे चलता होगा? जानकारी के अनुसार, इस परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार किसी एक व्यक्ति या एक व्यवसाय पर निर्भर नहीं है।
परिवार के सदस्य अपनी-अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। परिवार के कुछ लोग व्यवसाय से जुड़े हैं, कुछ सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं, जबकि कई सदस्य कृषि का काम भी संभालते हैं।
इस प्रकार परिवार की आर्थिक व्यवस्था विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। जब परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देते हैं, तो जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति के कंधों पर नहीं रहती।
शिक्षा और करियर में भी आगे है परिवार
भारद्वाज परिवार की खास बात यह है कि संयुक्त परिवार में रहते हुए भी परिवार के सदस्य शिक्षा और अपने करियर में आगे बढ़ रहे हैं। परिवार की बेटियां भी शिक्षा और प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
परिवार की बेटी रजनी भारद्वाज प्रशासनिक सेवा से जुड़ी हुई हैं। वहीं दीपक और प्रशांत भारद्वाज कानून के क्षेत्र में कार्यरत हैं और सुप्रीम कोर्ट में वकालत से जुड़े बताए जाते हैं।
यह परिवार इस बात का उदाहरण है कि संयुक्त परिवार में रहने का अर्थ व्यक्तिगत विकास को रोक देना नहीं है। परिवार की एकजुटता और व्यक्तिगत सफलता एक साथ आगे बढ़ सकती हैं।
चुनाव के दौरान बढ़ जाती है परिवार की अहमियत
90 सदस्यों वाला यह परिवार स्थानीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान रखता है। चुनाव के समय राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजर इस परिवार पर रहती है। परिवार के सदस्यों की बड़ी संख्या के कारण राजनीतिक प्रतिनिधि भी यहां पहुंचकर समर्थन मांगते हैं।
आसपास के लोगों में यह चर्चा रहती है कि परिवार किस उम्मीदवार या दल के पक्ष में अपना समर्थन देगा। हालांकि चुनाव के परिणाम केवल एक परिवार से तय नहीं होते, लेकिन इतने बड़े परिवार का संगठित मतदाता समूह स्थानीय स्तर पर निश्चित रूप से ध्यान आकर्षित करता है।
परिवार को जोड़कर रखना रही पहली प्राथमिकता
परिवार के मुखिया छज्जूराम लंबे समय तक राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। परिवार के सदस्य बताते हैं कि उन्हें राजनीतिक पदों के अवसर भी मिले, लेकिन उन्होंने परिवार की एकता और बच्चों की शिक्षा को हमेशा अधिक प्राथमिकता दी।
बताया जाता है कि उन्होंने ब्लॉक समिति के चेयरमैन बनने का प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं किया। उनके लिए परिवार को एक साथ रखना और नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा।
आधुनिक समाज के लिए एक बड़ी सीख
भारद्वाज परिवार की कहानी केवल 90 लोगों के एक साथ रहने की कहानी नहीं है। यह कहानी है आपसी विश्वास, जिम्मेदारी, लोकतांत्रिक निर्णय और पारिवारिक सहयोग की।
संयुक्त परिवार की परंपरा आधुनिक जीवनशैली के कारण कई जगह कमजोर होती जा रही है, लेकिन ऐसे परिवार यह साबित करते हैं कि यदि आपसी सम्मान और संवाद बना रहे, तो बड़ी से बड़ी पारिवारिक व्यवस्था भी सफलतापूर्वक चल सकती है।
चार पीढ़ियों के 90 सदस्यों का एक साथ रहना निश्चित रूप से आसान नहीं है। इसके लिए त्याग, धैर्य और एक-दूसरे को समझने की जरूरत होती है। भारद्वाज परिवार का उदाहरण यही संदेश देता है कि परिवार केवल एक घर में रहने वाले लोगों का समूह नहीं होता, बल्कि वह सहयोग और विश्वास से बनने वाली एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें हर सदस्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
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