राजेश तिवारी ; कांग्रेस की नई यूपी मीडिया टीम में मिली जिम्मेदारी,
राजेश तिवारी कौन हैं? कांग्रेस की नई यूपी मीडिया टीम में मिली जिम्मेदारी, 10 बार जेल जाने का दावा
राजनीतिक आंदोलनों से लेकर कांग्रेस की संगठनात्मक और मीडिया जिम्मेदारियों तक, जानिए राजेश तिवारी का राजनीतिक सफर, 2027 यूपी चुनाव को लेकर उनकी रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर लगाए गए उनके तीखे आरोपों की पूरी कहानी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। सभी प्रमुख दल संगठन को मजबूत करने और अपने संदेश को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी राजनीतिक माहौल में कांग्रेस की नई मीडिया टीम में राजेश तिवारी का नाम सामने आया है।
राजेश तिवारी का कांग्रेस से जुड़ाव करीब ढाई दशक पुराना बताया जाता है। OneIndia को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, कांग्रेस संगठन में निभाई जिम्मेदारियों, राहुल गांधी के साथ काम करने के अनुभव और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर विस्तार से बातचीत की।
राजेश तिवारी से जुड़ी प्रमुख बातें
कौन हैं राजेश तिवारी?
राजेश तिवारी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2000 के आसपास कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद वह यूथ कांग्रेस से जुड़े और संगठन में जिला सचिव तथा जिला प्रवक्ता जैसी जिम्मेदारियां संभालीं।
समय के साथ उनकी भूमिका उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही। उन्होंने उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस के संगठनात्मक, चुनावी और मीडिया संबंधी कार्यों में जिम्मेदारी निभाई। उनका राजनीतिक सफर मुख्य रूप से संगठन, मीडिया, प्रशिक्षण और चुनावी प्रबंधन के आसपास रहा है।
कांग्रेस की नई मीडिया टीम में मिली जिम्मेदारी
सितंबर 2026 में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के लिए नई मीडिया टीम की घोषणा की। इस व्यवस्था में प्रदेश स्तर के प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्टों और जिला प्रवक्ताओं सहित कई पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं।
राजेश तिवारी को प्रदेश मीडिया पैनलिस्टों की टीम में शामिल किया गया है। इस जिम्मेदारी के तहत पार्टी के राजनीतिक मुद्दों को मीडिया के सामने रखने, टीवी डिबेट में हिस्सा लेने और सार्वजनिक मंचों पर कांग्रेस का पक्ष रखने की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
सोनिया गांधी के नामांकन से प्रभावित होने का दावा
अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत के बारे में बात करते हुए राजेश तिवारी ने बताया कि सोनिया गांधी के चुनावी नामांकन के दौरान जुटी भीड़ और लोगों के उत्साह ने उन्हें कांग्रेस की ओर आकर्षित किया।
उन्होंने बताया कि उनके परिवार में सीधे तौर पर कोई सक्रिय राजनीतिज्ञ नहीं था। उनके पिता बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े थे। वहीं उन्होंने अपने दादा के बारे में बताया कि वह कलकत्ता में रहते थे और महात्मा गांधी के आंदोलन से जुड़े थे। इसी पारिवारिक माहौल और छात्र राजनीति के अनुभवों के बाद उनका कांग्रेस से जुड़ाव मजबूत हुआ।
यूथ कांग्रेस से राष्ट्रीय जिम्मेदारियों तक का सफर
कांग्रेस में शामिल होने के बाद राजेश तिवारी ने यूथ कांग्रेस से शुरुआत की। जिला स्तर की जिम्मेदारियों से आगे बढ़ते हुए उन्हें अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक कार्य करने का अवसर मिला।
उत्तराखंड में पार्टी के कार्यक्रमों से जुड़ने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर की मीडिया गतिविधियों से भी जुड़े। मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के चुनावों में भी उनकी भूमिका बताई गई है।
राहुल गांधी के साथ काम करने का अनुभव
राहुल गांधी के साथ काम करने के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर राजेश तिवारी ने इसे अपने लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ काम करने के दौरान उन्हें संगठनात्मक काम और राजनीतिक मुद्दों को जनता तक पहुंचाने का अनुभव मिला।
यह राजेश तिवारी द्वारा इंटरव्यू में व्यक्त किया गया उनका व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण है।
2027 के यूपी चुनाव में क्या होगी रणनीति?
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजेश तिवारी ने रोजगार, महंगाई, महिला सुरक्षा, शिक्षा और किसानों से जुड़े मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच स्थानीय मुद्दों को लेकर जाने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस के बताए प्रमुख चुनावी मुद्दे
- रोजगार और युवाओं के अवसर
- महिला सुरक्षा
- शिक्षा व्यवस्था
- किसानों की आय
- नई परियोजनाएं और विकास
- संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना
2022 के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस की चुनौती
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 2022 विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन पर भी सवाल उठे। 2022 में कांग्रेस ने 403 विधानसभा सीटों में से 399 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और पार्टी को दो सीटों पर जीत मिली थी।
राजेश तिवारी का कहना है कि चुनावी राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और कांग्रेस इस बार संगठन को मजबूत करके बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी।
ब्राह्मण-मुस्लिम राजनीति पर राजेश तिवारी के तीखे आरोप
OneIndia से बातचीत में उत्तर प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा के दौरान राजेश तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बेहद तीखे राजनीतिक आरोप लगाए।
ब्राह्मण और ठाकुर राजनीति पर भी बोले
राजेश तिवारी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण, ठाकुर, मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों के सामाजिक समीकरणों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इन समुदायों के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने का प्रयास करेगी।
उन्होंने राज्य सरकार पर कुछ प्रभावशाली नेताओं और अपराध से जुड़े लोगों को संरक्षण देने जैसे आरोप भी लगाए। ये राजनीतिक आरोप हैं और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा स्वतंत्र प्रमाणों के आधार पर इनका अलग से मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।
क्या ठाकुर वोट कांग्रेस के साथ जाएगा?
इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों पर चर्चा के दौरान राजेश तिवारी ने कहा कि सभी ठाकुर मतदाता BJP के साथ नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन में आने वाले सामाजिक समूहों को लेकर अपना राजनीतिक आकलन भी सामने रखा।
हालांकि किसी भी सामाजिक समूह के मत व्यवहार को लेकर किसी एक नेता का दावा पूरे समुदाय की वास्तविक चुनावी पसंद का प्रमाण नहीं माना जा सकता। चुनाव के दौरान मतदाताओं का व्यवहार अलग-अलग क्षेत्रों, उम्मीदवारों, मुद्दों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।
कांग्रेस के संभावित प्रमुख मुद्दे
- रोजगार और युवाओं के लिए अवसर
- महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था
- शिक्षा व्यवस्था में सुधार
- किसानों की आय और कृषि से जुड़े मुद्दे
- नई परियोजनाओं और विकास को बढ़ावा
अकेले चुनाव या गठबंधन?
2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी या समाजवादी पार्टी समेत किसी अन्य दल के साथ गठबंधन करेगी, इस सवाल पर राजेश तिवारी ने कहा कि अंतिम निर्णय कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो फैसला करेगा, कांग्रेस के कार्यकर्ता उसी के अनुसार चुनावी तैयारियों में जुटेंगे। इसलिए सीटों के बंटवारे और गठबंधन की अंतिम तस्वीर फिलहाल राजनीतिक नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर करेगी।
10 बार जेल जाने और 15 से 20 मुकदमों का दावा
राजेश तिवारी ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान जेल जाने और मुकदमों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक राजनीतिक आंदोलनों के दौरान उनके खिलाफ करीब 15 से 20 मुकदमे दर्ज हुए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वह राजनीतिक आंदोलनों के कारण करीब 10 बार जेल जा चुके हैं। उनके अनुसार ये मामले मुख्य रूप से राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े रहे।
“योगी मुख्यमंत्री नहीं, मठ की राजनीति कर रहे हैं”
इंटरव्यू के दौरान राजेश तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता विकास की जगह सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण पर अधिक है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दलित, पिछड़े, ब्राह्मण और मुस्लिम सहित अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।
मुख्यमंत्री और BJP सरकार को लेकर लगाए गए ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक बयान हैं। इन्हें निष्पक्ष रूप से समझने के लिए संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया, सरकारी आंकड़ों और स्वतंत्र रिपोर्टों को भी साथ में देखना जरूरी है।
राजेश तिवारी उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई मीडिया व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं में शामिल हैं। छात्र राजनीति और यूथ कांग्रेस से शुरू हुआ उनका सफर विभिन्न राज्यों की संगठनात्मक और मीडिया जिम्मेदारियों तक पहुंचा है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले उनकी भूमिका पार्टी के राजनीतिक संदेश को टीवी डिबेट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में दिखाई दे सकती है। उन्होंने रोजगार, महिला सुरक्षा, शिक्षा, किसान और विकास जैसे मुद्दों को कांग्रेस की प्राथमिकताओं में बताया है।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और BJP सरकार पर लगाए गए उनके कई आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन दावों को संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र प्रमाणों के संदर्भ में ही समझना उचित होगा।
