BRICS देशों के साथ कारोबार बढ़ा, लेकिन भारत को क्यों हो रहा भारी नुकसान
₹21,592 अरब का व्यापार घाटा! BRICS देशों के साथ कारोबार बढ़ा, लेकिन भारत को क्यों हो रहा भारी नुकसान?
BRICS के साथ व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन भारत जितना निर्यात कर रहा है, उसके मुकाबले कहीं ज्यादा सामान इन देशों से आयात कर रहा है। यही बढ़ता अंतर भारत के व्यापार घाटे को लगातार बड़ा बना रहा है।
कारोबार दोगुने से ज्यादा, लेकिन फायदा किसे?
GTRI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 में भारत और 11 सदस्यीय BRICS समूह के बीच कुल माल व्यापार करीब $203.1 अरब था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर $417.5 अरब पहुंच गया।
पहली नजर में यह भारत की बढ़ती वैश्विक व्यापारिक ताकत का संकेत दिखाई देता है। लेकिन जब निर्यात और आयात को अलग-अलग देखा जाता है तो तस्वीर बदल जाती है।
| व्यापार | वित्त वर्ष 2021 | वित्त वर्ष 2026 | वृद्धि |
|---|---|---|---|
| कुल माल व्यापार | $203.1 अरब | $417.5 अरब | 2 गुने से अधिक |
| भारत का निर्यात | $64.3 अरब | $95.7 अरब | 48.8% |
| भारत का आयात | $138.8 अरब | $321.8 अरब | 131.8% |
| व्यापार घाटा | $74.5 अरब | $226.1 अरब | 3 गुने से अधिक |
भारत के कुल आयात में BRICS की बड़ी हिस्सेदारी
BRICS अब भारत के लिए केवल राजनीतिक या कूटनीतिक मंच नहीं रह गया है। व्यापार के लिहाज से भी यह समूह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो चुका है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल माल आयात में BRICS देशों की हिस्सेदारी बढ़कर 41.5 प्रतिशत हो गई। वित्त वर्ष 2021 में यह हिस्सेदारी 35.2 प्रतिशत थी।
दूसरी ओर भारत के कुल निर्यात में BRICS देशों की हिस्सेदारी मामूली घटकर 21.7 प्रतिशत रह गई, जो पांच वर्ष पहले लगभग 22 प्रतिशत थी।
भारत के लिए चुनौती सिर्फ BRICS के साथ व्यापार बढ़ाने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि निर्यात भी उसी गति से बढ़े जिस गति से आयात बढ़ रहा है।
चीन बना सबसे बड़ी चुनौती
भारत के BRICS आयात में चीन की भूमिका सबसे बड़ी है। वित्त वर्ष 2021 में भारत ने चीन से करीब 65.2 अरब डॉलर का आयात किया था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 131.6 अरब डॉलर हो गया।
लेकिन चीन को भारत का निर्यात 21.2 अरब डॉलर से घटकर करीब 19.5 अरब डॉलर रह गया। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन और ज्यादा गहरा हुआ है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, औद्योगिक कंपोनेंट्स, केमिकल्स और अन्य कई उत्पादों के लिए भारतीय उद्योग चीन से आने वाले सामान पर निर्भर रहता है। यही निर्भरता व्यापार घाटे को कम करने की दिशा में बड़ी चुनौती बन सकती है।
रूस से आयात में जबरदस्त उछाल
रूस के साथ भारत के व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। वित्त वर्ष 2021 में भारत ने रूस से करीब 5.5 अरब डॉलर का आयात किया था।
वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 55.4 अरब डॉलर हो गया। इस वृद्धि में ऊर्जा की बढ़ी हुई खरीद की बड़ी भूमिका रही।
रूस को भारत का निर्यात भी 2.7 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 4.5 अरब डॉलर हुआ, लेकिन यह वृद्धि आयात की तुलना में काफी छोटी रही।
UAE भारत के लिए बना बड़ा निर्यात बाजार
BRICS देशों में UAE भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार बनकर सामने आया है।
वित्त वर्ष 2026 में UAE को भारत का निर्यात करीब 37.4 अरब डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2021 की तुलना में 124 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि UAE से भारत का आयात भी लगभग 140 प्रतिशत बढ़कर 63.9 अरब डॉलर पहुंच गया।
BRICS की वैश्विक व्यापार ताकत कितनी बड़ी है?
BRICS की आर्थिक ताकत लगातार बढ़ रही है। GTRI के मुताबिक 11 BRICS अर्थव्यवस्थाओं ने वर्ष 2025 में करीब 5.67 ट्रिलियन डॉलर के सामान का निर्यात किया।
यह दुनिया के कुल माल निर्यात का लगभग 21.6 प्रतिशत है। वहीं इन देशों का कुल आयात करीब 4.58 ट्रिलियन डॉलर रहा।
इस तरह पूरे समूह ने करीब 1.09 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया।
BRICS के अंदर आपसी व्यापार अभी भी बड़ा अवसर
BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार अभी भी उनकी कुल वैश्विक व्यापार क्षमता की तुलना में कम है। समूह के सदस्य एक-दूसरे को लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात करते हैं।
यह उनके कुल निर्यात का करीब 18.8 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की अभी भी काफी गुंजाइश मौजूद है।
भारत के सामने कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं?
- चीन से होने वाली आयात निर्भरता को कम करना।
- BRICS देशों में भारतीय उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाना।
- गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए बातचीत करना।
- ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात पर जोर देना।
- भारतीय कंपनियों को नए BRICS बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाना।
- कुछ चुनिंदा देशों पर अत्यधिक आयात निर्भरता को कम करना।
दिल्ली सम्मेलन से क्यों बढ़ी उम्मीद?
दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाली BRICS बैठक के बीच व्यापार असंतुलन का मुद्दा काफी महत्वपूर्ण हो गया है। भारत के लिए यह मौका अपने निर्यातकों के हितों और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने का हो सकता है।
यदि भारतीय उत्पादों के लिए BRICS बाजारों में बेहतर अवसर तैयार होते हैं, गैर-टैरिफ बाधाएं कम होती हैं और व्यापार प्रक्रियाएं आसान बनती हैं, तो भारत अपने निर्यात को तेज कर सकता है।
खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट्स, खाद्य प्रसंस्करण और तकनीकी उत्पादों के क्षेत्र में भारत के पास निर्यात बढ़ाने की अच्छी संभावनाएं हैं।
निष्कर्ष: व्यापार बढ़ाना ही नहीं, संतुलित करना भी जरूरी
BRICS के साथ भारत का व्यापार पिछले पांच वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़ना निश्चित रूप से आर्थिक रिश्तों की मजबूती का संकेत है। लेकिन 226.1 अरब डॉलर यानी करीब ₹21,592 अरब का व्यापार घाटा यह बताता है कि भारत के सामने बड़ी चुनौती भी मौजूद है।
अब भारत के लिए लक्ष्य केवल व्यापार का आकार बढ़ाना नहीं, बल्कि व्यापार संतुलन सुधारना होना चाहिए।
BRICS की विशाल बाजार क्षमता को भारतीय निर्यात के पक्ष में बदलना आने वाले समय में भारत की व्यापार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। अगर भारत आयात पर निर्भरता कम करते हुए उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाने में सफल होता है, तो वर्तमान व्यापार घाटे को भविष्य के आर्थिक अवसर में बदला जा सकता है।
यह लेख उपलब्ध व्यापार आंकड़ों और GTRI से संबंधित रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के आधार पर विश्लेषणात्मक रूप से तैयार किया गया है। आंकड़ों को संदर्भ और समझ के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
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