बिहार की राजनीति में एनकाउंटर बयान पर घमासान,

गिहार विधानसभा
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बीजेपी के भीतर से भी उठे सवाल
भारत की राजनीति में कानून-व्यवस्था और अपराध हमेशा से बड़े चुनावी मुद्दे रहे हैं। जब भी किसी राज्य में अपराध बढ़ने की खबरें सामने आती हैं, विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करता है और सत्ता पक्ष अपनी नीतियों का बचाव करता है। इन दिनों बिहार की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एनकाउंटर संबंधी बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी विधायक सीपी सिंह के बयान की हो रही है। उन्होंने इस मामले को जाति से जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती। अपराधी केवल अपराधी होता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरणों को लेकर लगातार बहस चल रही है।

अपराध और जाति को जोड़ना गलत
बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि अपराध की दुनिया में शामिल व्यक्ति किसी भी जाति या समुदाय से हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अपराध केवल किसी एक वर्ग के लोग करते हैं। समाज में राजपूत, ब्राह्मण, बनिया, यादव या किसी भी अन्य जाति के लोग रहते हैं और हर समाज का अपना सम्मान और महत्व है। हर व्यक्ति को अपनी जाति और परंपरा पर गर्व होना चाहिए, लेकिन अपराध को जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।सीपी सिंह का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिहार की राजनीति लंबे समय से जातिगत ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में बीजेपी विधायक का यह कहना कि अपराध का कोई जातीय स्वरूप नहीं होता, एक अलग राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

“जाति पूछकर एनकाउंटर नहीं किया जाता”
भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता की भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह कानून का सम्मान करे और कोई गैर-कानूनी कार्य न करे।उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अपनी बात स्पष्ट की। उनके अनुसार, यदि कोई अपराधी पुलिस पर हमला करता है या पुलिस को खुली चुनौती देता है, तो पुलिस आत्मरक्षा में कार्रवाई करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस कभी भी किसी व्यक्ति की जाति पूछकर एनकाउंटर नहीं करती और न ही जाति देखकर किसी को गिरफ्तार किया जाता है।यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि बिहार में अपराध बढ़ रहा है और सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में विफल हो रही है। वहीं बीजेपी के नेता इसे कानून लागू करने की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।

मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी दी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी का बयान उनका व्यक्तिगत विचार हो सकता है। लेकिन उनका मानना है कि अपराधी चाहे किसी भी वर्ग या जाति का हो, उसे कानून के तहत सख्त सजा मिलनी चाहिए।हंसराज विश्वकर्मा का यह बयान भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बीजेपी अपराध के मुद्दे को जातीय रंग देने के पक्ष में नहीं है।

बिहार में अपराध को लेकर बढ़ती चिंता
बिहार में हाल के दिनों में हत्या, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं की खबरों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियां सरकार पर हमलावर हैं।कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने बिहार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में अपराध की “बाढ़” आ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में हर दिन हत्या, लूट और महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, बिहार की पहचान अब अपराध प्रभावित राज्य के रूप में बनने लगी है।उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार देश में इस मामले में पहले ही शीर्ष राज्यों में शामिल हो चुका है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपराधियों पर नियंत्रण करने में नाकाम साबित हो रही है।

बीजेपी शासित राज्यों पर विपक्ष का हमला
अजय कुमार लल्लू ने केवल बिहार ही नहीं, बल्कि अन्य बीजेपी-शासित राज्यों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी अपराध की स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार, बीजेपी कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग दिखाई देती है।विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार अपराध रोकने में सफल होती, तो लगातार इस तरह की घटनाएं सामने नहीं आतीं। वहीं बीजेपी का दावा है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और कानून अपना काम कर रहा है।

नीट घोटाले और एनटीए चीफ के बयान पर राजनीति
इसी बीच नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक मामले ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। एनटीए चीफ द्वारा पेपर लीक से इनकार किए जाने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है और जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए। वहीं विपक्ष आरोप लगा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।नीट विवाद ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ा दी है। बिहार का नाम इस मामले में आने के कारण राज्य की राजनीति में यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है।

शराबबंदी के बीच नया विवाद
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर शराब से जुड़े विवाद सामने आते रहते हैं। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास के पास खाली शराब की बोतलें मिलने की घटना ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।राष्ट्रीय जनता दल की नेता रोहिणी आचार्य ने इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में शराबबंदी लागू है, तो मुख्यमंत्री आवास के आसपास शराब की बोतलें कैसे मिलीं।इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बिहार की राजनीति में बढ़ता तनाव
इन तमाम घटनाओं ने बिहार की राजनीति को और अधिक गर्म कर दिया है। एक तरफ कानून-व्यवस्था और अपराध को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ जाति और एनकाउंटर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।बीजेपी के भीतर से अलग-अलग राय सामने आना यह दिखाता है कि पार्टी भी इस विषय को लेकर सावधानी बरतना चाहती है। वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को सरकार की विफलता के रूप में पेश करने में जुटा हुआ है।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाती है और यह मुद्दा राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में यह विवाद लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
लेखक विनय पंडित