देवास (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के देवास जिले से सामूहिक विवाह के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि शमशाबाद के एक दंपती ने विवाह की तलाश में जुटे परिवारों को निशाना बनाते हुए 42 से अधिक परिवारों से लाखों रुपये वसूल लिए और सामूहिक विवाह कराने का झांसा देकर उन्हें देवास बुला लिया। जब तय तारीख पर दूल्हे और उनके परिजन विवाह स्थल पर पहुंचे तो वहां न कोई आयोजन था और न ही कोई आयोजक मौजूद मिला। इस घटना के बाद पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
शादी का सपना दिखाकर वसूले रुपये
जानकारी के अनुसार आरोपियों ने अपने परिचितों और मध्यस्थों के माध्यम से विभिन्न जिलों के उन परिवारों से संपर्क किया, जिनके घरों में युवकों की शादी नहीं हो पा रही थी। परिवारों को भरोसा दिलाया गया कि देवास में एक बड़े सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया जाएगा, जहां योग्य युवतियों के साथ विवाह संपन्न कराया जाएगा।परिवारों को विश्वास में लेने के लिए पूरी योजना तैयार की गई थी। उन्हें बताया गया कि विवाह से एक दिन पहले यानी सभी परिवार माता टेकरी के दर्शन करेंगे और उसके बाद राधागंज स्थित क्लब मैदान में उनके ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। इस आयोजन में शामिल होने के लिए प्रत्येक परिवार से 25-25 हजार रुपये जमा कराए गए।बताया जा रहा है कि कई परिवारों ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर यह राशि जमा कराई थी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उनके बेटे का घर बस जाएगा।
तय तारीख पर पहुंचने के बाद खुला राज
अलग-अलग जिलों से दर्जनों युवक अपने परिवारों के साथ देवास पहुंचे। कई लोग पारंपरिक विवाह की तैयारी के साथ आए थे। कुछ परिवारों ने बैंड-बाजे और अन्य रस्मों की तैयारी भी कर रखी थी।लेकिन जब सभी लोग राधागंज स्थित क्लब मैदान पहुंचे तो वहां किसी भी प्रकार के विवाह समारोह के कोई संकेत नहीं मिले। न तो कोई मंच सजा था, न कोई विवाह संबंधी तैयारी दिखाई दी और न ही आयोजन समिति का कोई सदस्य मौजूद था।शुरुआत में लोगों ने इसे किसी प्रकार की तकनीकी या व्यवस्थागत समस्या समझा, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने आयोजकों की तलाश शुरू कर दी।
लाखों रुपये लेकर फरार होने का आरोप
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि सामूहिक विवाह के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूली गई और बाद में आयोजक फरार हो गए। यदि 42 से अधिक परिवारों से 25-25 हजार रुपये लिए गए हैं तो कुल राशि 10 लाख रुपये से भी अधिक बैठती है। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही ठगी की वास्तविक रकम सामने आ सकेगी।कई पीड़ितों का कहना है कि उन्हें बार-बार भरोसा दिलाया गया था कि विवाह पूरी तरह वैध और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाएगा। इसी भरोसे में उन्होंने पैसे जमा कराए और अपने रिश्तेदारों को भी समारोह की जानकारी दी थी।
परिवारों को लगा बड़ा मानसिक आघात
इस घटना ने केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाया बल्कि कई परिवारों को मानसिक और सामाजिक रूप से भी प्रभावित किया है। जिन युवकों की शादी की उम्मीद में परिवार देवास पहुंचे थे, उन्हें रिश्तेदारों और समाज के सामने शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से अपने बेटों के लिए रिश्ता तलाश रहे थे और इस आयोजन को अंतिम उम्मीद के रूप में देख रहे थे। ऐसे में ठगी का शिकार होने के बाद वे खुद को ठगा हुआ और असहाय महसूस कर रहे हैं।
बढ़ती ठगी की घटनाओं पर सवाल
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि शादी-विवाह जैसे संवेदनशील विषयों को आधार बनाकर ठग किस तरह लोगों की भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सामूहिक विवाह या वैवाहिक आयोजन में शामिल होने से पहले आयोजकों की पहचान, संस्था का पंजीकरण और कार्यक्रम की वैधता की जांच करना बेहद जरूरी है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि पुलिस जल्द आरोपियों तक पहुंचेगी और उनके पैसे वापस दिलाने के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
पुलिस जांच में जुटी
मामले की जानकारी मिलते ही बीएनपी थाना पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिन लोगों पर रुपये लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वे फिलहाल मौके पर नहीं मिले हैं। पुलिस ने उनके एक परिचित से पूछताछ शुरू कर दी है और पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
