दिल्ली स्वास्थ्य विभाग का कथित ₹650-700 करोड़ दवा घोटाला
भ्रष्टाचार, राजनीतिक आरोप और जांच के बीच आखिर क्या है पूरा मामला?
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में कथित ₹650 करोड़ से ₹700 करोड़ के दवा एवं चिकित्सा उपकरण खरीद मामले ने राजधानी की राजनीति को गर्मा दिया है। यह मामला केवल सरकारी खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाओं और उपकरणों की खरीद में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए स्वयं को भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने वाली सरकार बता रही है।
मुख्य आरोप
विपक्ष का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों के लिए बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर दवाएं, बेडशीट, एक्स-रे मशीन, एनेस्थीसिया उपकरण और अन्य चिकित्सा सामग्री खरीदी गई। आरोपों के अनुसार ₹2.50 का ORS पैकेट ₹15 में तथा ₹150 की बेडशीट ₹450 तक में खरीदी गई।
क्या हैं प्रमुख अनियमितताएं?
- सरकारी खरीद में बाजार मूल्य से कई गुना अधिक भुगतान।
- ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को दरकिनार कर स्थानीय केमिस्ट टेंडर प्रणाली अपनाने का आरोप।
- चुनिंदा सप्लायर्स को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में कथित बदलाव।
- फर्जी कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल करने के आरोप।
- सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न।
राजीव रंगीला का नाम क्यों चर्चा में?
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि राजीव रंगीला नामक व्यक्ति कथित रूप से फर्जी कंपनियों के जरिए महंगे टेंडर हासिल करने वाला प्रमुख लाभार्थी है। विपक्ष का दावा है कि वास्तविक मास्टरमाइंड तक जांच नहीं पहुंच रही है और केवल औपचारिक कार्रवाई की जा रही है।
भाजपा सरकार का पक्ष
दिल्ली भाजपा का कहना है कि जैसे ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) से जांच कराने के आदेश दिए। सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार को छिपाने के बजाय तुरंत कार्रवाई की गई।
| भाजपा का दावा | विपक्ष का आरोप |
|---|---|
| मुख्यमंत्री ने तुरंत ACB जांच के आदेश दिए। | सरकार असली आरोपियों को बचा रही है। |
| वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। | केवल अधिकारियों पर कार्रवाई, बड़े नाम सुरक्षित। |
| यह अधिकारियों के स्तर का भ्रष्टाचार था। | यह ₹700 करोड़ तक का बड़ा वित्तीय घोटाला है। |
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) की जांच के बाद पूर्व DGHS वत्सला अग्रवाल तथा डॉ. विजय कुमार रंगा सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां कई आईएएस अधिकारियों, वकीलों और सप्लायर्स की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। मामले में दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया की गहन पड़ताल जारी है।
जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल
यदि सरकारी खरीद में वास्तव में करोड़ों रुपये की अनियमितता हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या केवल अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है या निर्णय लेने वाले सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? दूसरी ओर यदि आरोप राजनीतिक हैं तो निष्पक्ष जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग का यह कथित खरीद मामला अब केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं रह गया है। यह सार्वजनिक धन की सुरक्षा, सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है। अंतिम सत्य जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा जो भी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
