अबान अहमद की अंतिम विदाई ने छोड़े कई सवाल
अबान अहमद की अंतिम विदाई ने छोड़े कई सवाल
चार साल बाद एक साथ दिखे तीन भाई, भावुक माहौल के बीच शाइस्ता परवीन की कथित मौजूदगी को लेकर सवाल अभी भी बरकरार।
प्रयागराज में अतीक अहमद के परिवार से जुड़ा एक बार फिर बेहद भावुक और चर्चित घटनाक्रम सामने आया। अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को 8 अगस्त की शाम कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अंतिम विदाई के दौरान परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे और करीब चार साल बाद अतीक के तीन बेटे एक साथ दिखाई दिए। लेकिन पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल एक ही बना रहा—क्या अबान की मां और अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन भी अपने बेटे को आखिरी बार देखने वहां पहुंची थीं?
सबसे बड़ा सवाल
क्या शाइस्ता परवीन वास्तव में अपने बेटे अबान अहमद को अंतिम विदाई देने कब्रिस्तान के आसपास मौजूद थीं?
इस सवाल का जवाब अब तक साफ नहीं है। कब्रिस्तान के आसपास बुर्का पहने कुछ महिलाओं की मौजूदगी के बाद चर्चाएं तेज हुईं और दावा किया गया कि इनमें शाइस्ता परवीन भी शामिल थीं।
हालांकि पुलिस ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यही वजह है कि अबान की अंतिम विदाई से जुड़ी यह कहानी अभी भी एक बड़े सवाल के साथ खत्म होती है।
शाइस्ता परवीन वहां थीं या नहीं?
अबान के जनाजे के दौरान कब्रिस्तान की दूसरी तरफ गिरी हुई दीवार के पास कई महिलाएं बुर्का पहनकर खड़ी दिखाई दीं। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि शायद शाइस्ता परवीन भी दूर से अपने छोटे बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंची थीं।
दावा यह भी किया गया कि वह पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था के कारण कब्रिस्तान के भीतर नहीं गईं और दूर से ही बेटे के जनाजे को देखती रहीं। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात पुलिस का बयान है।
पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं
पुलिस अधिकारियों ने किसी भी महिला की पहचान आधिकारिक रूप से शाइस्ता परवीन के रूप में नहीं की। इसलिए केवल चर्चाओं या तस्वीरों के आधार पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता।
DCP मनीष शांडिल्य के अनुसार, मौके पर काफी संख्या में लोग मौजूद थे और सिर्फ किसी बुर्का पहने महिला के दिखाई देने के आधार पर उसकी पहचान शाइस्ता परवीन के रूप में नहीं की जा सकती।
यानी, फिलहाल यह मामला दावे और चर्चाओं तक ही सीमित है। आधिकारिक पुष्टि के बिना यह कहना संभव नहीं है कि शाइस्ता वास्तव में अपने बेटे के जनाजे में मौजूद थीं या नहीं।
चार साल बाद एक साथ दिखे तीन भाई
अबान की अंतिम विदाई का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब उसके बड़े भाई उमर और अली जेल से पैरोल पर पहुंचे और छोटे भाई अहजम के साथ दिखाई दिए। करीब चार साल बाद तीनों भाई एक साथ नजर आए।
परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन था। एक तरफ छोटे भाई अबान की मौत का गम था, तो दूसरी तरफ परिवार के पुराने जख्म भी एक बार फिर ताजा हो गए।
जब तीनों भाई अपने पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रों के पास पहुंचे तो माहौल बेहद भावुक हो गया।
भावुक कर देने वाला पल
बताया गया कि कब्रों के पास पहुंचने के बाद तीनों भाई काफी भावुक हो गए और रोने लगे। वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
अप्रैल 2023 में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले अतीक का बेटा असद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उस समय उमर और अली जेल में थे।
अब उसी कब्रिस्तान में परिवार के एक और सदस्य अबान को भी दफनाया गया। इस वजह से अंतिम विदाई का यह क्षण परिवार के लिए और भी ज्यादा भावुक बन गया।
भाइयों ने खुद दिया जनाजे को कंधा
शाम के समय अबान का जनाजा कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंचा। नमाज के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। उमर, अली और अहजम ने अपने छोटे भाई के जनाजे को कंधा दिया।
उमर और अली के जेल से पहुंचने की खबर के बाद बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए। देखते ही देखते भीड़ बढ़ने लगी और पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सुरक्षा व्यवस्था की मुख्य बातें
- पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई।
- बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती रही।
- भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई।
- कुछ स्थानों पर पुलिस को भीड़ संभालने में मशक्कत करनी पड़ी।
कई स्थानों पर बैरिकेडिंग टूटने की खबरें भी सामने आईं। कुछ लोगों ने दूसरे रास्तों से कब्रिस्तान के भीतर जाने की कोशिश की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
बड़े भाई उमर ने पढ़ाई जनाजे की नमाज
अबान के जनाजे से जुड़ी एक और खास बात यह रही कि अंतिम नमाज की इमामत बड़े भाई उमर ने की। कब्रिस्तान और मस्जिद के आसपास कई धार्मिक व्यक्ति मौजूद थे, लेकिन उमर ने खुद अपने छोटे भाई की जनाजे की नमाज पढ़ाने की इच्छा जताई।
बताया गया कि जेल में रहने के दौरान उमर धार्मिक किताबों का अध्ययन करता रहा है और कुरआन की तिलावत भी करता है। इसी वजह से उसने अपने छोटे भाई की अंतिम नमाज खुद पढ़ाई।
भाई ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी
एक भाई अपने छोटे भाई की अंतिम यात्रा में मौजूद था और उसी ने उसकी जनाजे की नमाज की इमामत भी की। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक करने वाला बताया गया।
वैन के अंदर से एक-दूसरे को देखते रहे भाई
उमर और अली की मुलाकात भी काफी भावुक रही। दोनों अलग-अलग जेलों से कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज लाए गए। काफी समय बाद जब दोनों भाई आमने-सामने आए तो भावनाओं को रोक नहीं सके।
दोनों एक-दूसरे से गले मिले और रो पड़े। चार साल के लंबे अंतराल के बाद भाइयों की यह मुलाकात अबान की मौत के कारण हुई थी।
अहजम भी बेहद भावुक दिखाई दिया। कब्रिस्तान पहुंचते समय उसे सहारे की जरूरत पड़ी। वह अपने भाइयों से मिलने की कोशिश करता रहा और परिवार के सदस्यों के बीच गम का माहौल बना रहा।
बुआ से मुलाकात और परिवार की चर्चा
अबान को दफनाने के बाद तीनों भाई परिवार के अन्य सदस्यों से भी मिले। उन्होंने अपनी बुआ परवीन कुरैशी से मुलाकात की। बताया गया कि यह मुलाकात भी काफी भावुक रही और परिवार के सदस्य एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े।
अल्लाह ने ये कैसा दिन दिखा दिया, आखिर हमें ऐसे दिन क्यों देखने पड़ रहे हैं?
— परिवार की भावुक प्रतिक्रियाबातचीत के दौरान परिवार के कई सदस्यों का जिक्र हुआ। मां शाइस्ता परवीन, चाची और जेल में बंद अन्य रिश्तेदारों को लेकर भी चर्चा की गई।
परिवार के सामने अब कई जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में बड़े भाइयों ने छोटे भाई अहजम को परिवार और घर की जिम्मेदारी संभालने की सलाह दी।
आखिर सच क्या है?
अबान अहमद की अंतिम विदाई का पूरा घटनाक्रम कई भावुक दृश्यों और चर्चाओं से भरा रहा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल शाइस्ता परवीन की कथित मौजूदगी को लेकर बना हुआ है।
क्या वह सचमुच कब्रिस्तान के बाहर खड़ी होकर अपने बेटे को अंतिम विदाई दे रही थीं? या बुर्का पहने महिलाओं को देखकर केवल अटकलें लगाई गईं?
फिलहाल इसका स्पष्ट और आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। पुलिस ने किसी महिला की पहचान शाइस्ता परवीन के रूप में नहीं की है। इसलिए इस मामले में दावे और वास्तविक पुष्टि के बीच अंतर समझना जरूरी है।
एक बात जरूर साफ है कि अबान की अंतिम विदाई ने अतीक अहमद के परिवार के पुराने दुखों को फिर से सामने ला दिया। चार साल बाद तीन भाइयों का मिलना, परिवार के सदस्यों का भावुक होना और कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार—इन सभी घटनाओं ने इस दिन को बेहद भावनात्मक बना दिया।
सवाल अभी भी बरकरार है
क्या एक मां अपने बेटे को आखिरी बार देखने आई थी? जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, शाइस्ता परवीन की मौजूदगी का रहस्य एक सवाल ही बना रहेगा।
