इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की मौत

इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की मौत

इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की मौत: दो महीने तक जिंदगी से जंग के बाद टूटी सांसें
BREAKING NEWS इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की मौत के बाद जांच तेज
अपडेटेड: 31 अगस्त 2026
क्राइम न्यूज़

इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की मौत: दो महीने तक जिंदगी से जंग के बाद टूटी सांसें, अपहरण और हत्या के आरोपों ने उठाए कई सवाल

इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर

मोहाली/चंडीगढ़। सोशल मीडिया पर अपने मेकअप और म्यूजिक वीडियो के जरिए हजारों लोगों के बीच पहचान बनाने वाली 28 वर्षीय इन्फ्लुएंसर और मेकअप आर्टिस्ट मनजीत कौर अब इस दुनिया में नहीं रहीं। करीब दो महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 26 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ के PGIMER में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मामले का सबसे बड़ा सवाल

परिवार ने आरोप लगाया है कि मनजीत को पहले अगवा किया गया, उनके साथ मारपीट की गई और बाद में कथित रूप से उन्हें मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मनजीत कौर की मौत के बाद सामने आई कहानी केवल एक कथित आपराधिक हमले तक सीमित नहीं रह गई है। परिवार के आरोपों ने इस मामले को गंभीर बना दिया है। साथ ही पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और कथित देरी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली मनजीत कौर मोहाली के खरड़ क्षेत्र में किराए के मकान में रहती थीं। वह पेशे से मेकअप आर्टिस्ट थीं और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वह मेकअप और संगीत से जुड़े वीडियो साझा करती थीं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 1.46 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं।

मनजीत तलाकशुदा थीं और अपने पीछे सात साल के एक बेटे को छोड़ गई हैं। उनकी अचानक और दर्दनाक मौत ने परिवार के साथ-साथ उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स को भी झकझोर दिया है।

घटना से मौत तक: पूरी टाइमलाइन

3 जुलाई 2026

परिवार के अनुसार मनजीत कौर को चंडीगढ़ के सेक्टर-34 इलाके में बुलाया गया था और इसके बाद कथित घटना हुई।

9 जुलाई 2026

गंभीर हालत के बाद मनजीत को चंडीगढ़ स्थित PGIMER में भर्ती कराया गया।

5 अगस्त 2026

परिवार के अनुसार मनजीत को होश आया और उन्होंने कथित घटना के बारे में जानकारी दी।

26 अगस्त 2026

करीब दो महीने तक जिंदगी से संघर्ष करने के बाद PGIMER में इलाज के दौरान मनजीत कौर की मौत हो गई।

3 जुलाई की रात क्या हुआ था?

परिवार की शिकायत के अनुसार, 3 जुलाई की देर रात मनजीत कौर को चंडीगढ़ के सेक्टर-34 इलाके में एक शराब के ठेके के पास बुलाया गया था। परिवार ने अपनी शिकायत में शुभी और पिंदा नाम के दो लोगों पर मनजीत को जबरन अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया है।

परिवार का आरोप है कि दोनों लोग उन्हें एक कार में बैठाकर पंजाब के मोरिंडा क्षेत्र में ले गए। वहां उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। इसके बाद परिवार के अनुसार उन्हें एक पेड़ से बांध दिया गया और आग लगा दी गई।

परिवार के आरोप

  • मनजीत कौर को चंडीगढ़ के सेक्टर-34 इलाके में बुलाया गया।
  • दो लोगों पर उन्हें जबरन साथ ले जाने का आरोप लगाया गया।
  • मोरिंडा क्षेत्र में कथित रूप से मारपीट किए जाने का आरोप है।
  • परिवार के अनुसार उन्हें कथित रूप से पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई।

बताया जाता है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मनजीत का एक दोस्त मौके पर पहुंचा और कथित रूप से कंबल की मदद से आग बुझाई। इसके बाद गंभीर हालत में उन्हें पहले मोरिंडा के एक अस्पताल ले जाया गया।

हालत बिगड़ने पर उन्हें मोहाली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में चंडीगढ़ स्थित PGIMER रेफर कर दिया गया।

दो महीने तक चली जिंदगी की जंग

मनजीत कौर को 9 जुलाई को PGIMER में भर्ती कराया गया था। उनके शरीर पर गंभीर रूप से जलने के निशान थे और वह लंबे समय तक बेहोश रहीं। कई सप्ताह तक परिवार उनकी हालत को लेकर चिंतित रहा।

बताया गया कि 5 अगस्त को मनजीत को होश आया। परिवार का दावा है कि होश में आने के बाद उन्होंने कथित घटना के बारे में अपने परिवार को जानकारी दी। परिवार का यह भी आरोप है कि मनजीत पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराना चाहती थीं।

यहीं से पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए। मनजीत की मां का आरोप है कि PGI चौकी को उनकी बेटी के होश में आने और बयान देने की स्थिति में होने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद परिवार के अनुसार जांच अधिकारी समय पर अस्पताल नहीं पहुंचे।

महत्वपूर्ण: परिवार का दावा है कि इस संबंध में PGI चौकी में DDR भी दर्ज की गई थी। मामले में पुलिस की पूर्व कार्रवाई और सूचना मिलने के समय को लेकर जांच जारी है।

मौत के बाद दर्ज हुई अपहरण और हत्या की FIR

इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि 3 जुलाई को कथित घटना होने और गंभीर रूप से झुलसने की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बावजूद हत्या के प्रयास का मामला पहले क्यों दर्ज नहीं हुआ।

खरड़ सदर थाना पुलिस के अनुसार, जब मनजीत को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब अस्पताल की ओर से उनके गंभीर रूप से झुलसने की सूचना पुलिस को दी गई थी। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर परिवार से जानकारी ली थी।

परिवार ने उस समय बताया था कि मनजीत सेक्टर-34 में एक परिचित महिला से मिलने गई थीं और वहां कथित रूप से दो लोगों ने उनके साथ मारपीट की। बाद में उन्हें मोरिंडा ले जाने का आरोप लगाया गया।

पुलिस के अनुसार, परिवार के बयान के आधार पर DDR दर्ज की गई और संबंधित जानकारी चंडीगढ़ के सेक्टर-34 थाना पुलिस को भेजी गई थी। लेकिन मनजीत की मौत के बाद उनकी मां कांता देवी की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

चंडीगढ़ पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ BNS की धारा 140(1), 103(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत अपहरण, हत्या और एक से अधिक लोगों की साझा आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

पुलिस की जांच के मुख्य बिंदु

  • दोनों आरोपियों की तलाश में छापेमारी।
  • सेक्टर-34 और आसपास के CCTV कैमरों की जांच।
  • कथित रूप से इस्तेमाल किए गए वाहन की पहचान की कोशिश।
  • टोल प्लाजा की रिकॉर्डिंग को जांच में शामिल करने की संभावना।
  • घटना से जुड़े सभी डिजिटल और तकनीकी सबूतों की जांच।

जिस लाइव का इंतजार था, वह कभी नहीं आया

मनजीत कौर की हालत को लेकर जुलाई के अंत में उनके एक दोस्त और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिल मोहाली की ओर से एक पोस्ट साझा की गई थी। पोस्ट में कहा गया था कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और वह ठीक होने के बाद खुद लाइव आकर पूरी घटना के बारे में बताएंगी।

कहा गया था कि मनजीत जल्द स्वस्थ होकर खुद बताएंगी कि उनके साथ क्या हुआ और उस रात कौन लोग शामिल थे। लोगों से जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील भी की गई थी।

लेकिन जिस लाइव का हजारों लोग इंतजार कर रहे थे, वह कभी नहीं आया।

26 अगस्त को मनजीत कौर की मौत हो गई।

जांच के सामने अब कई बड़े सवाल

अब जांच के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—3 जुलाई की रात वास्तव में क्या हुआ? मनजीत को किसने और किस उद्देश्य से बुलाया? उन्हें मोरिंडा कौन लेकर गया? उन पर कथित हमला किसने किया और क्यों?


इसके अलावा अस्पतालों और पुलिस को सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई हुई, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच, सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।


मनजीत कौर की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में शुरुआती कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण होती है और क्या हर सूचना पर समय रहते पर्याप्त कदम उठाए गए थे।


इस मामले में सच्चाई तक पहुंचने और जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने की जिम्मेदारी अब जांच एजेंसियों के सामने है।

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