राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता तोड़ो’ बयान पर विवाद,
राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता तोड़ो’ बयान पर विवाद, कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं का प्रदर्शन
महिला सम्मान, समानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी से कई सवाल पूछे।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा महिलाओं से कथित तौर पर “पितृसत्ता तोड़ने” का आह्वान किए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी के बयान को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर कुछ बुर्काधारी मुस्लिम महिलाओं ने प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी से सवाल पूछे।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि यदि राहुल गांधी महिलाओं की बराबरी और सम्मान की बात करते हैं, तो मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और उनकी समस्याओं पर भी उसी मजबूती से आवाज उठाई जानी चाहिए।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने महिलाओं के मुद्दे पर अपनी बात रखते समय मुख्य रूप से मनुस्मृति का संदर्भ दिया, जिसके बाद उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वह हिंदू समाज और हिंदू धार्मिक ग्रंथों से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रमुखता से उठाते हैं, जबकि अन्य समुदायों में महिलाओं से जुड़े विवादास्पद और गंभीर सामाजिक मुद्दों पर अपेक्षाकृत कम बोलते हैं।
कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर उस समय असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब कुछ मुस्लिम महिलाएं वहां पहुंचीं और राहुल गांधी तथा कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
महिलाओं का कहना था कि महिला सम्मान और समानता की चर्चा किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सवाल किया कि यदि कांग्रेस महिलाओं को बराबरी देने और राजनीति तथा समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने की बात करती है, तो मुस्लिम महिलाओं के सामने मौजूद मुद्दों को भी उसी गंभीरता से क्यों नहीं उठाया जाता।
कर्नाटक सरकार पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार को लेकर भी सवाल उठाए। एक महिला ने दावा किया कि कांग्रेस महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की बात करती है, लेकिन कर्नाटक सरकार में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल बने हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केवल सार्वजनिक मंचों से महिला सशक्तिकरण की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों को अपने संगठन और सरकारों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस कदम भी उठाने चाहिए।
महिलाओं ने राहुल गांधी से यह भी आग्रह किया कि महिलाओं से जुड़े धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बात करते समय सभी समुदायों के मामलों को समान दृष्टि से देखा जाए।
‘ट्रिपल तलाक’ के मुद्दे पर भी सवाल
प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाओं ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे को भी उठाया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं से जुड़े इस विषय पर राजनीतिक दलों ने लंबे समय तक अलग-अलग रुख अपनाया है।
महिला ने कहा कि राहुल गांधी को मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं और उनके अनुभवों को भी सीधे सुनना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राजनीतिक दल अक्सर महिला अधिकारों के मुद्दे को राजनीतिक बहस के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन महिलाओं की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए पर्याप्त संवाद नहीं करते।
हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से क्या औपचारिक प्रतिक्रिया दी गई, यह स्पष्ट नहीं हो सका।
‘पितृसत्ता तोड़ो’ के बयान से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि राहुल गांधी के 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ी बताई जा रही है। कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं, समाज और पितृसत्ता के मुद्दे पर अपनी बात रखी थी।
उनके बयान के बाद राजनीतिक विरोधियों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अपनी बात रखने के लिए मनुस्मृति का उल्लेख कर हिंदू धार्मिक परंपराओं और ग्रंथों को निशाने पर लिया।
इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी इस विषय को लेकर बहस तेज हो गई।
विवाद का मुख्य सवाल
आलोचकों का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा करते समय सभी धर्मों और समुदायों में मौजूद सामाजिक चुनौतियों को समान रूप से देखा जाना चाहिए।
सिर्फ हिंदू समाज को निशाना बनाने का आरोप
राहुल गांधी पर पहले भी कई बार हिंदू धर्म और हिंदू परंपराओं से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करने को लेकर राजनीतिक आरोप लगते रहे हैं।
उनके आलोचकों का कहना है कि वह हिंदू धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं की आलोचना तो करते हैं, लेकिन दूसरे धर्मों में महिलाओं से जुड़े विवादास्पद मुद्दों पर उतनी मुखरता से नहीं बोलते।
वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस के समर्थक इस तरह के आरोपों को राजनीतिक बताते हैं। उनका तर्क है कि महिलाओं की समानता और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की बहस को केवल धार्मिक या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
महिला सम्मान की राजनीति पर नई बहस
दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर महिला अधिकारों, धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक दलों की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।
सवाल यह है कि क्या भारत में महिला सशक्तिकरण की राजनीति सभी समुदायों की महिलाओं की समस्याओं को समान रूप से जगह दे रही है?
प्रदर्शनकारी महिलाओं का संदेश स्पष्ट था कि महिला सम्मान और बराबरी की लड़ाई किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं को सभी धर्मों और समाजों की महिलाओं की समस्याओं को सुनना चाहिए और समान अधिकारों के सवाल पर एक समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी इस विवाद तथा प्रदर्शनकारी महिलाओं द्वारा उठाए गए सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह मुद्दा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस का रूप लेता है।
