नौकरी की चाह में फंसीं तीन सहेलियां,

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नौकरी की चाह में फंसीं तीन सहेलियां, यौन शोषण के सबूत वाली पेन ड्राइव पुलिस को सौंपी
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नौकरी की चाह में फंसीं तीन सहेलियां, यौन शोषण के सबूत वाली पेन ड्राइव पुलिस को सौंपी

वीडियो वायरल करने और जान से मारने की धमकी देकर कथित तौर पर किया जाता रहा शोषण, पुलिस की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

मामले के मुख्य आरोप

तीन युवतियों ने पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी है। उनका दावा है कि इसमें उनके साथ हुए कथित शोषण से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं।

करी करके कुछ बनने और बेहतर भविष्य की उम्मीद में तीन सहेलियां कथित तौर पर कुछ रसूखदार लोगों के चंगुल में फंस गईं। अब इन युवतियों ने अपने साथ हुए कथित यौन शोषण के संबंध में पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी है, जिसमें उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं। युवतियों का आरोप है कि उन्हें जबरन बीयर पीने और सिगरेट पीने के लिए मजबूर किया जाता था। इसके बाद उनके साथ कथित रूप से अशोभनीय और अमानवीय व्यवहार किया जाता था।

पीड़िताओं के अनुसार, आरोपियों द्वारा उन्हें निर्वस्त्र कर डांस करने के लिए मजबूर किया जाता था और नशे की हालत में उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था। युवतियों ने आरोप लगाया है कि उनके आपत्तिजनक वीडियो और फोटो भी बनाए गए। बाद में इन्हीं वीडियो और तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर कथित तौर पर उनका लगातार शोषण किया जाता रहा।

तीनों युवतियों का कहना है कि जब उन्होंने आरोपियों से दूरी बनाने की कोशिश की तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। साथ ही गालियां देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया गया है।

युवतियों का दावा है कि इस मामले में अन्य लड़कियां भी कथित रूप से शिकार हो चुकी हैं, लेकिन बदनामी और सामाजिक दबाव के डर से वे सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं।

पुलिस की भूमिका पर उठने लगे सवाल

इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि घटना की शिकायत मिलने के बाद शुरुआती दिनों में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। युवतियों की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद समय पर मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया।

मेडिकल परीक्षण में देरी को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। पीड़िताओं का कहना है कि मेडिकल न होने के कारण आगे की कार्रवाई और अदालत में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। मामले की जांच अब सीओ सिटी स्तर के अधिकारी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।

मामले के प्रमुख बिंदु

  • तीन युवतियों ने कथित शोषण के संबंध में शिकायत दर्ज कराई।
  • पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी एक पेन ड्राइव सौंपी गई।
  • वीडियो और फोटो वायरल करने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।
  • नौकरी दिलाने के नाम पर कथित शोषण का आरोप है।
  • पुलिस कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

22 की रात दर्ज कराई गई थी रिपोर्ट

बताया गया है कि शहर कोतवाली में 22 तारीख की रात शहर के अलग-अलग तीन मोहल्लों में रहने वाली तीन युवतियों ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में तीन कारोबारियों और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

युवतियों ने आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने और भविष्य संवारने का भरोसा देकर उनके साथ लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि उनकी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाए गए।

बाद में जब युवतियों ने नौकरी और भविष्य से जुड़े वादों के बारे में सवाल उठाए तो कथित तौर पर उन्हें वीडियो और तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी दी गई।

इंटर कॉलेज के समय से हैं तीनों सहेलियां

तीनों युवतियां लंबे समय से एक-दूसरे की सहेलियां हैं और इंटर कॉलेज के समय से साथ पढ़ती रही हैं। तीनों का कहना है कि नौकरी और करियर की तलाश के दौरान उनकी मुलाकात एक परिचित के माध्यम से कुछ प्रभावशाली लोगों से हुई।

युवतियों के अनुसार, शुरुआत में उन्हें नौकरी दिलाने और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। इसी भरोसे के आधार पर वे आरोपियों के संपर्क में आईं। उनका आरोप है कि करीब छह महीने तक अलग-अलग तरीकों से उनका शोषण किया गया।

पीड़िताओं का कहना है कि शुरुआत के करीब दो महीने बाद ही उन्हें संदेह होने लगा था कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनके साथ धोखा किया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने आरोपियों से दूरी बनाने का प्रयास किया, लेकिन कथित रूप से उन्हें उनके आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें दिखाकर डराया गया।

वीडियो वायरल करने की धमकी से डरी रहीं युवतियां

युवतियों के मुताबिक, उन्हें साफ तौर पर कहा गया कि यदि वे बुलाने पर नहीं आएंगी या आरोपियों की बात नहीं मानेंगी तो उनके वीडियो और फोटो इंटरनेट पर वायरल कर दिए जाएंगे। इस धमकी के कारण तीनों युवतियां लंबे समय तक भय और मानसिक दबाव में रहीं।

उनका कहना है कि उन्होंने इस बारे में उस व्यक्ति को भी बताया था, जिसके माध्यम से उनकी पहचान आरोपियों से हुई थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। युवतियों ने अपनी शिकायत में कहा है कि वीडियो वायरल होने का डर इतना अधिक था कि वे लंबे समय तक खुलकर किसी से अपनी पीड़ा साझा नहीं कर सकीं।

मामले में एक युवती ने जाति के आधार पर अपमानित किए जाने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, उसे कथित तौर पर जातिसूचक शब्द कहे जाते थे और गालियां देकर अपमानित किया जाता था।

जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

पुलिस को सौंपी गई पेन ड्राइव को इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। इसमें मौजूद सामग्री की जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता और घटनाक्रम को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस के सामने अब चुनौती है कि डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए और पीड़िताओं के आरोपों की निष्पक्ष एवं गंभीरता से जांच की जाए।

अब जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले ने एक बार फिर नौकरी, करियर और बेहतर भविष्य का सपना देखने वाली युवतियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। साथ ही यह भी जरूरी है कि गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल की जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम सच जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। युवतियों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और आरोपियों का पक्ष तथा पुलिस जांच के निष्कर्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।

महत्वपूर्ण सूचना

इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी भी व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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