मेजा तहसील के अंत्योदय कार्डों पर गंभीर सवाल, जांच एजेंसी से जांच की मांग
मेजा तहसील के अंत्योदय कार्डों पर गंभीर सवाल, जांच एजेंसी से जांच की मांग
प्रयागराज/मेजा। प्रयागराज जिले की मेजा तहसील में अंत्योदय राशन कार्डों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय धर्मसंघ की संयोजक सुनीता मिश्रा ने आरोप लगाया है कि मेजा तहसील क्षेत्र में बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के नाम अंत्योदय कार्डों में दर्ज होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने जिलाधिकारी प्रयागराज और उपजिलाधिकारी मेजा से पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अंत्योदय योजना का उद्देश्य समाज के सबसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। यदि पात्रता के विपरीत आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को योजना का लाभ मिलता है तो इससे योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।
नीलम करवरिया के कार्यकाल का भी किया उल्लेख
सुनीता मिश्रा ने कहा कि जब नीलम करवरिया मेजा की विधायक थीं, उस समय खाद्य एवं रसद विभाग के कार्यालय में कई तरह की समस्याएं सामने आती थीं। उनके अनुसार उस दौरान व्यवस्था को कुछ हद तक सुधारने का प्रयास किया गया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति फिर खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मेजा तहसील के खाद्य एवं आपूर्ति कार्यालय की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा की जाए और यह देखा जाए कि राशन कार्ड बनाने, संशोधित करने और निरस्त करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हो रही है या नहीं।
बार-बार अधिकारियों के तबादले पर सवाल
सुनीता मिश्रा ने आरोप लगाया कि मेजा में सप्लाई इंस्पेक्टरों का बार-बार तबादला भी व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कारण हो सकता है। उनका कहना है कि कई बार अधिकारी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह समझ पाते, उससे पहले ही उनका स्थानांतरण हो जाता है।
व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है कि अधिकारी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझें और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करें।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका और कार्यप्रणाली की पर्याप्त समीक्षा नहीं होती। इससे स्थानीय स्तर पर शिकायतों और संभावित अनियमितताओं की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाने की आशंका रहती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग के अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
सुनीता मिश्रा ने प्रशासनिक व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर निगरानी और अधिकारियों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी का निवास प्रयागराज शहर में हो और उसे मेजा तहसील पहुंचने में लंबा समय लगे तो क्षेत्र में नियमित निगरानी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को निरीक्षण और निगरानी की ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें वास्तविक स्थिति की जांच प्रभावी ढंग से की जा सके और किसी भी संभावित अनियमितता को समय रहते पकड़ा जा सके।
एक परिवार में कई अंत्योदय कार्ड का आरोप
सुनीता मिश्रा ने मेजा तहसील में अंत्योदय कार्डों को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि कुछ मामलों में एक ही परिवार या घर से जुड़े कई लोगों के नाम पर अंत्योदय कार्ड होने की शिकायतें सामने आती हैं।
उन्होंने दावा किया कि कुछ ऐसे लोगों के भी कार्ड बनने की बात सामने आती है जिनके पास ट्रैक्टर, पक्के मकान या पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को अंत्योदय योजना का लाभ मिल रहा है तो यह वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के साथ अन्याय है।
सुनीता मिश्रा की प्रमुख मांगें
- मेजा तहसील के अंत्योदय कार्डों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।
- संदिग्ध और अपात्र कार्डों की जांच की जाए।
- अपात्र पाए जाने वाले कार्ड नियमानुसार निरस्त किए जाएं।
- वास्तविक पात्र गरीब परिवारों को योजना में शामिल किया जाए।
- जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
- खाद्य एवं आपूर्ति कार्यालय की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा हो।
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
सुनीता मिश्रा ने जिलाधिकारी प्रयागराज और उपजिलाधिकारी मेजा से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या निष्पक्ष टीम से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान अंत्योदय कार्डों की सूची का घर-घर सत्यापन किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार जो लोग पात्र पाए जाएं, उनका कार्ड बरकरार रखा जाए और जो लोग पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते, उनके कार्ड नियमानुसार निरस्त किए जाएं। इसके बाद वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों को योजना में शामिल किया जाए।
स्थानीय स्तर की भूमिका पर भी उठाए सवाल
सुनीता मिश्रा ने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया में ग्राम्य विकास अधिकारी, लेखपाल और ग्राम प्रधान की भूमिका को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि इन्हीं स्तरों पर सत्यापन होने से निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका हो तो प्रशासन को वैकल्पिक और स्वतंत्र जांच व्यवस्था बनानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति या कर्मचारी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाना होना चाहिए।
पात्रों तक पहुंचे अंत्योदय योजना का लाभ
अंत्योदय योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सरकारी सहायता है। इसलिए राशन कार्डों में पारदर्शिता और पात्रता सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि मेजा तहसील में कार्डों को लेकर किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सुनीता मिश्रा ने कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकार से जुड़े विषय के रूप में देखना चाहिए। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष हो, पात्र परिवारों को उनका अधिकार मिले और अपात्र लोगों को सरकारी योजना का लाभ न मिले।
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