छत्तीसगढ़ शराब घोटाला

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 3000 करोड़ के कथित खेल में फिर ईडी की कार्रवाई
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 3000 करोड़ के कथित खेल में फिर ईडी की कार्रवाई, जानिए कौन हैं इस मामले के बड़े किरदार

कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के आवास पर ईडी की कार्रवाई के बाद एक बार फिर चर्चा में आया छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित कथित शराब घोटाला।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला ईडी कार्रवाई
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में ईडी ने एक बार फिर कार्रवाई तेज कर दी है। कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के आवास पर छापेमारी के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। जांच एजेंसी ने कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के आवास पर कार्रवाई की है।

ईडी का आरोप है कि राज्य में हुए कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, इस मामले में राजनीतिक नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और निजी कारोबारियों से जुड़े एक कथित संगठित नेटवर्क की जांच हुई है।

कब हुआ था कथित शराब घोटाला?

ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब कारोबार से जुड़ी व्यवस्था और नीतियों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई।

जांच एजेंसी के शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस कथित अवैध कारोबार से लगभग 3000 करोड़ रुपये की गैरकानूनी कमाई हुई। ईडी ने जांच के दौरान यह भी दावा किया कि कथित अपराध से होने वाली कुल आय इससे अधिक हो सकती है।

2019

ईडी के अनुसार, कथित अवैध गतिविधियों से जुड़े मामले की समयावधि की शुरुआत इसी अवधि से मानी गई।

2019 से 2022

जांच एजेंसी के अनुसार, इसी अवधि में कथित शराब सिंडिकेट से जुड़ी गतिविधियों की जांच की गई।

जांच और गिरफ्तारियां

मामले में कई राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की गई।

नई ईडी कार्रवाई

रामगोपाल अग्रवाल के आवास पर कार्रवाई के बाद मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में है।

जांच एजेंसी के प्रमुख दावे

  • कथित शराब सिंडिकेट व्यवस्था पर प्रभाव रखता था।
  • अवैध तरीके से बड़ी रकम की कमाई का आरोप है।
  • राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच की गई।
  • कथित अपराध से प्राप्त धन के प्रवाह और प्रबंधन की जांच जारी है।

जानिए इस मामले के अहम किरदारों के बारे में

1

चैतन्य बघेल

इस मामले में सबसे चर्चित नामों में चैतन्य बघेल का नाम शामिल रहा है। ईडी ने उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया था और वह कुछ समय तक जेल में भी रहे। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित अपराध से प्राप्त धन के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जांच की गई। ईडी ने दावा किया था कि कथित घोटाले से जुड़े धन में से बड़ी रकम की प्राप्ति और प्रबंधन की भूमिका की भी जांच हुई।

2

कवासी लखमा

कथित शराब घोटाले के दौरान कवासी लखमा राज्य के आबकारी मंत्री थे। उनका नाम भी इस मामले की जांच में सामने आया। वह इस प्रकरण में जेल में रहे और बाद में जमानत पर बाहर आए।

ईडी का दावा है कि जांच के दौरान आबकारी विभाग से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और कमीशन की व्यवस्था की जांच की गई।

3

सौम्या चौरसिया

छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया का नाम भी इस मामले में सामने आया। जांच एजेंसी ने उनके कार्यकाल और प्रशासनिक भूमिका से जुड़े पहलुओं की जांच की।

ईडी का आरोप है कि पद पर रहते हुए उन्होंने कथित शराब सिंडिकेट को लाभ पहुंचाने में भूमिका निभाई। इस मामले में उन्हें अदालत से शर्तों के साथ जमानत मिल चुकी है।

4

IAS निरंजन दास

आईएएस अधिकारी निरंजन दास का नाम भी इस मामले में प्रमुखता से सामने आया। वह आबकारी विभाग में आयुक्त के पद पर कार्यरत रहे हैं।

ईडी ने दावा किया है कि कथित शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन में उनकी भूमिका की जांच की गई। एजेंसी के अनुसार, शराब से जुड़े कथित रैकेट को संचालित करने में प्रशासनिक स्तर की भूमिका की भी पड़ताल की गई।

5

रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आया। उन्हें अप्रैल 2024 में गिरफ्तार किया गया था और वह लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहे।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित शराब घोटाले में रिश्वत और सिंडिकेट को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने से जुड़े पहलुओं की जांच की गई। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

रामगोपाल अग्रवाल के यहां कार्रवाई से फिर गरमाया मामला

कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के आवास पर ईडी की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

जांच एजेंसी का दावा है कि कथित शराब घोटाले से जुड़े धन और उसके प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कथित अपराध से प्राप्त धन का प्रवाह किन-किन स्तरों तक हुआ।

महत्वपूर्ण: इस मामले में जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा किया जाएगा। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों का अंतिम रूप से समाप्त होना नहीं होता और आरोप सिद्ध होने तक सभी को कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार प्राप्त है।

क्या होगा आगे?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला कथित आर्थिक अनियमितताओं, राजनीति और प्रशासन से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक बन चुका है। ईडी की नई कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आने वाले समय में इस मामले में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।

फिलहाल जांच जारी है और इस मामले से जुड़े कई आरोपों पर अदालतों में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने और न्यायिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

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