लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने सोमवार6 को एक कार्यक्रम के दौरान
कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सड़कों के उपयोग और जनसंख्या नियंत्रण को लेकर
स्पष्ट और सख्त संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम लोगों के आवागमन के लिए होती हैं
और किसी भी धार्मिक या अन्य गतिविधि के नाम पर सार्वजनिक मार्गों को
बाधित नहीं किया जा सकता।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती।
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है तथा
किसी भी व्यक्ति या समूह को सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने का अधिकार नहीं है।
लोग मुझसे पूछते हैं, साहब आपके यहाँ यूपी में क्या सड़कों पर
सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूँ, कतई नहीं होती है।
आप जाकर देख लो, नहीं होती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सार्वजनिक स्थानों के उचित उपयोग पर जोर देते हुए
कहा कि सड़कें लोगों के चलने और वाहनों के आवागमन के लिए बनाई गई हैं।
यदि कोई व्यक्ति या समूह सड़क या चौराहे को रोककर कोई गतिविधि करता है,
जिससे आम नागरिकों का आवागमन प्रभावित होता है, तो यह सार्वजनिक व्यवस्था के
लिए उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि धार्मिक गतिविधियों के लिए निर्धारित स्थानों का उपयोग किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, किसी को भी अपने अधिकारों का प्रयोग इस प्रकार नहीं करना चाहिए
जिससे दूसरे नागरिकों के अधिकार प्रभावित हों।
मुख्य बातें
- सार्वजनिक सड़कें आम नागरिकों के आवागमन के लिए हैं।
- किसी भी गतिविधि से यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए।
- कानून और नियम सभी नागरिकों के लिए समान होने चाहिए।
- धार्मिक स्वतंत्रता के साथ सार्वजनिक जिम्मेदारियों का पालन भी आवश्यक है।
“सड़कें चलने के लिए हैं, तमाशा बनने के लिए नहीं”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध करने से
बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले बच्चे,
कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, मरीज और अन्य आम नागरिक यातायात बाधित होने
से प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप करना नहीं है,
बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक व्यवस्था और कानून का पालन सभी के लिए
समान रूप से हो।
सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति आकर के चौराहे पर
आकर तमाशा बना देगा। क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का?
आवागमन बाधित करने का कौन सा अधिकार है? जहाँ उसका स्थल होगा वहाँ जाकर करें।
उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश सरकार की उस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें
सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बिना अनुमति सार्वजनिक गतिविधियों
से यातायात बाधित न होने देने पर जोर दिया जाता रहा है।
संख्या अधिक होने की दलील पर भी टिप्पणी
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या वृद्धि के मुद्दे पर भी
टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कई बार अधिक संख्या होने को स्थान की कमी या अन्य
व्यवस्थागत समस्याओं के लिए तर्क के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों के कारण व्यवस्था संबंधी
समस्या उत्पन्न होती है, तो गतिविधियों को अलग-अलग समय या चरणों में आयोजित करने जैसे
विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था और संसाधनों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या नियंत्रण
तथा परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता आवश्यक है। हालांकि जनसंख्या का मुद्दा केवल किसी
एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के सभी वर्गों और देश के समग्र विकास से जुड़ा विषय है।
सीएम योगी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त संसाधन और व्यवस्था नहीं है,
तो परिवार के आकार को लेकर जिम्मेदार निर्णय लेने चाहिए। उनके अनुसार,
संसाधनों और जनसंख्या के बीच संतुलन बनाना सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
“सिस्टम के साथ रहना है तो कानून मानना होगा”
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कानून और नियम
सभी नागरिकों के लिए समान हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में
नागरिकों को अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन इन अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी को समाज और सरकारी व्यवस्था के साथ मिलकर रहना है,
तो उसे देश और राज्य के कानूनों का सम्मान करना होगा।
सीएम योगी का संदेश था कि कानून-व्यवस्था के मामलों में सरकार किसी प्रकार का
भेदभाव नहीं करेगी। चाहे धार्मिक आयोजन हो, सामाजिक कार्यक्रम हो या कोई अन्य
सार्वजनिक गतिविधि, सभी को निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार
आयोजित किया जाना चाहिए।
कानून-व्यवस्था पर सरकार का स्पष्ट रुख
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार कानून-व्यवस्था को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करती रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान को भी इसी व्यापक नीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर बहस केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है।
देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर धार्मिक आयोजनों, जुलूसों, सभाओं और
अन्य सार्वजनिक गतिविधियों के कारण यातायात एवं व्यवस्था प्रभावित होने के मुद्दे
सामने आते रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुविधा के बीच
संतुलन बनाए रखना है। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी नागरिकों को अपने
अधिकारों का प्रयोग करने की स्वतंत्रता मिले, लेकिन किसी भी व्यक्ति की गतिविधि से
दूसरे लोगों के अधिकार और सुविधाएं प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि
उत्तर प्रदेश सरकार सार्वजनिक सड़कों को बाधित करने के मामले में सख्त रुख
अपनाने के पक्ष में है।
उनका संदेश है कि धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाएगा,
लेकिन कानून और सार्वजनिक व्यवस्था की कीमत पर किसी को भी
सड़क या चौराहे को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अंततः लोकतांत्रिक समाज की मजबूती इसी में है कि सभी नागरिक
अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें और
कानून का पालन करें।
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